
शहडोल. बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बाघों की संख्या बढ़ती जा रही है। उमरिया के लगभग 437 किमी क्षेत्रफल में फैले बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बाघों की संख्या 164 से ज्यादा हो गई है। बाघ बेहद ही शर्मिला और शांत स्वभाव का होता है, वह अकेला रहना पसंद करता है। ऐसे में उसकी टेरीटेरी में मानवीय दखल के चलते आपसी द्वंद्व की स्थिति निर्मित हो रही है। सबसे अधिक घटनाएं बांधवगढ़ नेशनल पार्क के लैण्ड स्केप में घटित हुई है। यहां के कोर एरिया में चरवाहा या लकड़ी बीनने वाले अंदर तक प्रवेश कर जाते हैं। यह क्षेत्र बाघों का प्रमुख रहवास है, उनके रहवास में दखल से द्वंद्व की स्थिति निर्मित होती हैं। इसके अलावा बाघों का बढ़ता घनत्व भी बाघ व मानव द्वंद का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। नर बाघ की 35-40 किमी व मादा बाघ की शावक के साथ 45-50 किमी टेरीटेरी होती है। बाघों का घनत्व बढऩे की वजह से बाघों का बफर व कोर सीमा से लगे रिहायसी क्षेत्रों की ओर मूवमेंट बढ़ा है। रिहायसी क्षेत्रों में बाघों के मूवमेंट की वजह से भी बाघ व मानव द्वंद्व की स्थितियां निर्मित हो रही है। वन्यजीव एक्सपट्र्स की मानें तो बाघों की टेरिटरी में कम दखल होने से उन्हे बचाया जा सकता है।
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बाघों की हो नियमित मॉनीटरिग
बांधवगढ़ नेशनल पार्क के कोर व बफर में कमजोर पेट्रोलिंग व बाघों की मॉनीटरिंग बांघों के आपसी संघर्ष व मानव शिकार का प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा बाघों के रहवास में मानव का दखल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण जंगल में अंदर तक पहुंच जाते हैं और वन्यजीवों का शिकार हो जाते हैं। कोर एरिया से लगे क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों को कम करने ठोस कदम उठाने होंगे। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में जंगली हाथियों की मौजूदगी की वजह से भी बाघों का मूवमेंट रिहायसी क्षेत्रों की ओर बढ़ गया है। गांव की सीमा में बाघों के मूवमेंट व पशुओं के शिकार की वजह से ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं। आवश्यक है कि पार्क प्रबंधन अलग-अलग माध्यमों से पेट्रोलिंग बढ़ाएं, बाघों के हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जाए और इनकी विधिवत मॉनीटरिंग हो तो घटनाओं को कम किया जा सकता है।
मृदुल पाठक, सेवानिवृत्त एफडी बांधवगढ़ नेशनल पार्क
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रहवास में दखल से बढ़ रहा द्वंद्व
बांधवगढ़ नेशनल पार्क के कोर जोन व इससे लगी सीमा में कई गांवों की बसाहट है। यहां के रहवासी पूरी तरह से जंगल पर निर्भर है। लकड़ी बीनने, मवेशी चराने व अन्य वनोपज संग्रह के लिए ग्रामीण कोर एरिया के अंदर तक चले जाते हैं। बाघों के रहवास में मानव के दखल से द्वंद की स्थिति निर्मित होती है। इसके अलावा बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बाघों के बढ़ते घनत्व के चलते मूवमेंट गांव की ओर बढ़ गया है। रिहायसी क्षेत्रों में मवेशियों के शिकार के दौरान बाघ व मानव द्वंद की स्थितियां निर्मित हो रही है। वन्यजीवों को जंगल के अंदर रहवास, भोजन व पानी उपलब्ध हो तो वह सीमा से बाहर नहीं जाएंगे और द्वंद्व की स्थितियां कम होंगी। बांधवगढ़ के क्षेत्र में लोगों का भी आना जाना लगा रहता है। प्रबंधन को बाघों की सुरक्षा को देखते हुए रिजर्व फारेस्ट के क्षेत्र को बढ़ाना चाहिए। बफर जोन की बढ़ोत्तरी करनी चाहिए। इसके साथ ही हाथियों के मूवमेंट पर भी नजर रखनी होगी।
पुष्पेन्द्रनाथ द्विवेदी, जिला मानसेवी वन्यप्राणी अभिरक्षक
Published on:
29 Jul 2024 12:30 pm
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