
नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह (फोटो- IANS)
Neeraj Chopra First Reaction after Javelin Throw Final: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार को नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो के फाइनल में दूसरे स्थान पर रहे। श्रीलंका के रुमेश पथिराने ने गोल्ड मेडल जीता। यह नीरज चोपड़ा का सीजन का बेस्ट प्रदर्शन था लेकिन वह गोल्ड मेडल से काफी मीटर दूर रहे। बाद में नीरज ने इसके पीछे की वजह बताई। उन्होंने खुलासा किया कि किस डर की वजह से वह अपने बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर पाए। हालांकि उन्होंने ये भी माना का वो इससे और बेहतर थ्रो कर सकते थे।
नीरज ने कहा, "बहुत खुशी है कि मेरे साथ यशवीर भी मेडल जीतने में सफल रहे। ऐसा पहले एशियन गेम्स में हुआ था, जहां मैंने और किशोर ने मेडल जीता था और मुझे खुशी है कि यशवीर ने यहां अपने सीजन का बेस्ट प्रदर्शन किया। काफी अच्छा लग रहा है कि हम पोडियम पर हैं। हमारी हमेशा कोशिश रहती है कि देश का नेशनल एंथम बजे, लेकिन ठीक है मैंने भी सीजन का अपना बेस्ट प्रदर्शन किया। मेरी वापसी ठीक हो रही है और आगे बाकी प्रतियोगिता में बेहतर करने की कोशिश करूंगा।"
नीरज ने गोल्ड मेडल जीतने वाले श्रीलंका के रुमेश थरंगा के थ्रो की तारीफ की, जिन्होंने 89.75 मीटर का थ्रो फेंका। उन्होंने कहा, "जाहिर तौर पर थरंगा का थ्रो काफी अच्छा था। मुझे भी लग रहा था कि मैं थोड़ा और बेहतर कर सकता हूं, लेकिन मैं लाइन नहीं पकड़ पा रहा था। मैं फिर से लय में आने की धीरे-धीरे कोशिश कर रहा हूं।" नीरज ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा, "पता नहीं मैं ठंड में उतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता हूं, मुझे गर्मी पसंद है, क्योंकि मेरे अंदर भारतीय खून है ना।"
नीरज ने अपनी फिटनेस को लेकर बात करते हुए कहा, "देखिए, मैं यह नहीं कह सकता हूं कि मेरी फिटनेस पहले जैसी है। अभी धीरे-धीरे उस फिटनेस को हासिल करने का प्रयास जारी है। इंजरी के बाद मेरी पहली प्रतियोगिता दोहा में थी, जहां कोई नहीं कह सकता कि हम अच्छी तैयारी में थे। हालांकि, यहां थोड़ा बेहतर था। बस कोशिश है कि आने वाली प्रतियोगिता में पूरी तरह से लय हासिल कर सकूं। यकीनन अभी और सुधार होगा। मैं यह नहीं कह सकता हूं कि सीजन बेस्ट के मेरे इस प्रदर्शन में बहुत सुधार हुआ है, लेकिन आगामी इवेंट्स में मैं और बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करूंगा।"
भारतीय स्टार एथलीट ने आगे कहा, "जब आप 100 प्रतिशत फिट रहते हैं, तो वो लड़ने का जज्बा अलग रहता है और लगता है कि कुछ भी कर सकते हैं। वहीं, जब आप इंजरी से आ रहे होते हैं, तो आपको सोच-समझकर कदम रखना पड़ता है। आज भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी, कभी लग रहा था कि पूरी जोर से दौड़ लगाऊं, तो कभी लग रहा था कि खुद को कंट्रोल में रखूं। मिली-जुली फीलिंग थी, लेकिन फिर भी थ्रो ठीक था।"
Updated on:
01 Aug 2026 01:19 pm
Published on:
01 Aug 2026 01:19 pm
