
विरोध के बाद रेग्यूलेशन पर बनी सहमति
-इंइिरागांधी नहर मेें दो अक्टूबर से 26 दिसम्बर तक चलाएंगे चार में दो समूह पानी
-जल परामशज़्दात्री समिति की बैठक में विधायकों ने की किसानों की पुरजोर पैरवी
हनुमानगढ़.
जल परामशज़्दात्री समिति की बैठक गुरुवार को जंक्शन स्थित जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कायाज़्लय में हुई। इसमेें सभी विधायकों ने एक मत से इंदिरागांधी नहर को फरवरी 2019 तक चार में दो समूह में चलाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन बैठक की अध्यक्षता कर रहे मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने इस प्रस्ताव को मानने में असमथज़्तता जताई।
उन्होंने कहा कि ड्राइ सीजन में 20 प्रतिशत रिस्क कवर करने के बाद भी इतना पानी नहीं बचता कि, इस प्रस्ताव को लागू किया जा सके। इस दौरान अपने प्रस्ताव को लागू करवाने को लेकर सभी विधायक कई देर तक जद्दोजहद करते रहे। बार-बार मांग रखने के बावजूद चीफ इंजीनियर की ओर से इनकार करने पर रायसिंहनगर विधायक सोना देवी बावरी तो एक बार बैठक छोड़कर बाहर भी चली गई।
मान-मन्नौवल करने पर वह दोबारा बैठक में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि जब विधायकों की मांग पर कभी गौर ही नहीं किया जाता तो फिर सुझाव देने का क्या फायदा। उनकी इस बात का अन्य विधायकों ने भी समथज़्न किया। मौजूद किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक मांग के अनुसार रेग्यूलेशन नहीं तैयार किया जाता, हम यहां से न तो मुख्य अभियंता को जाने देंगे और न ही खुद जाएंगे। रेग्यूलेशन को लेकर करीब साढ़े तीन घंटे की बहसबाजी के बाद आखिर दोपहर साढ़े तीन बजे बैठक नतीजे पर पहुंची।
मुख्य अभियंता ने विभाग की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव में फेरबदल कर 26 दिसम्बर तक इंदिरागांधी नहर को चार में दो समूह में चलाने का सुझाव देकर इसके बाद एक बारी पानी तीन में एक समूह चलाकर जनवरी में समीक्षा बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस बैठक में आवक को देखते हुए आगे का रेग्यूलेशन निधाज़्रित कर लेंगे। इस प्रस्ताव पर विधायकों और किसान प्रतिनिधियों ने हामी भरी।
इसके बाद औपचारिक रूप से बैठक समाप्ति की घोषणा की गई। इस तरह किसानों को रबी सीजन में बिजाई के लिए पयाज़्प्त पानी मिल सकेगा। खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ, सूरतगढ़ विधायक राजेंद्र भादू, अनूपगढ़ विधायक शिमला देवी बावरी, किसान प्रतिनिधि महेंद्र तरड़, सुशील गोदारा, प्रेम देहड़ू, जल संसाधन विभाग के एक्सईएन जेएस कलसी, एसई रामसिंह, कृषि विभाग के उप निदेशक जयनारायण बेनीवाल, कृषि अधिकारी बलकरण सिंह, पीएचईडी के एक्सईएन मेजर सिंह सहित अन्य बैठक में मौजूद थे।
इतना बनता है शेयर
जल संसाधन विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार रावी व्यास नदियों के पानी में राजस्थान का हिस्सा 26 सितम्बर 2018 से 20 मई 2019 तक 15,36, 262 क्यूसेक डेज बनता है। लेकिन ड्राइ सीजन में संभावित आवक को शामिल करते हुए विभाग ने जो रेग्यूलेशन का प्रस्ताव बनाया है, उसके अनुसार नहरों को चलाने पर 17, 25, 560 क्यूसेक पानी की आवश्यकता पड़ेगी। इस तरह कुल हिस्से की तुलना में 1, 89, 258 क्यूसेक डेज पानी की कमी रहेगी।
लेवल पर सवाल
इस वषज़् पौंग बांध का जल स्तर काफी अच्छा होने से किसान प्रतिनिधियों ने आगे दस बारी पानी देने की मांग की। लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी अधिकतम आठ बारी पानी देने की बात कहते रहे। इसके कारण बैठक के दौरान कई बार विरोध की स्थिति भी बनी। इस दौरान किसान प्रतिनिधि प्रेम देहूड़ू ने बांधों के लेवल को लेकर विभाग की ओर से तैयार दस्तावेजों पर सवाल भी उठाए।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने पानी के आंकड़ों को लेकर तैयार कागजों में हुई भूल को स्वीकार भी किया। बैठक के दौरान बैलेंस का पानी अनूपगढ़ की बजाय सूरतगढ़ में छोडऩे पर कुछ सदस्यों ने विरोध जताया। अनूपगढ़ विधायक ने कहा कि बरसों से बैलेंस का पानी अनूपगढ़ शाखा को मिलता रहा है, लेकिन अब अफसर नया नियम बना रहे हैं।
Published on:
28 Sept 2018 01:00 am
