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पितृ पक्ष में गली-मोहल्लों से कौवे गायब, राजस्थान के इस जिले में एसडीएम कार्यालय परिसर बना कौवों का तीर्थ

एसडीएम कार्यालय परिसर इस साल कौवों का स्थाई ठिकाना बन गया है। चारदीवारी से घिरे इस परिसर में लगे बड़े-बड़े पेड़ों पर हजारों की संख्या में कौवे प्रतिदिन जुट रहे हैं। सुबह से लेकर दोपहर तक यहां का नजारा किसी तीर्थस्थल जैसा दिखाई देता है।

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Suratgarh SDM office

कौवों को भोजन कराता श्रद्धालु (फोटो-पत्रिका)

सूरतगढ़। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस पखवाड़े में पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए ब्राह्मण भोजन, दान-पुण्य तथा विशेष रूप से कौवों को भोजन कराना आवश्यक है। यही कारण है कि हर साल श्राद्ध पक्ष में घर-घर की छतों, आंगनों और गली-मोहल्लों में श्रद्धालु कौवों का इंतजार करते हैं, ताकि उन्हें पिंडदान और श्राद्ध भोज अर्पित किया जा सके।

लेकिन इस बार सूरतगढ़ में हालात कुछ अलग हैं। शहर की गलियों और मोहल्लों में कौवों की दस्तक लगभग गायब हो चुकी है। लोग घंटों छतों पर भोजन सजाकर प्रतीक्षा करते हैं, मगर कौवे नजर ही नहीं आते। श्रद्धालु इससे चिंतित और हैरान हैं।

हजारों की संख्या में जुट रहे कौवे

ऐसे में आश्चर्यजनक रूप से एसडीएम कार्यालय परिसर कौवों का स्थाई ठिकाना बन गया है। चारदीवारी से घिरे इस परिसर में लगे बड़े-बड़े पेड़ों पर हजारों की संख्या में कौवे प्रतिदिन जुट रहे हैं। सुबह से लेकर दोपहर तक यहां का नजारा किसी तीर्थस्थल जैसा दिखाई देता है।

पितरों के लिए कौवों को भोजन

श्रद्धालुओं का कहना है कि पितृ पक्ष शुरू होते ही यहां कौवों की संख्या लगातार बढ़ी है। लोग परिवार सहित यहां पहुंचकर भोजन अर्पित कर रहे हैं। खीर-पूड़ी, फल, मिठाई और पिंडदान के लिए विशेष व्यंजन लाकर श्रद्धालु कौवों को खिलाते हैं। कौवों की झुंड के झुंड भोजन ग्रहण करते हैं, तो श्रद्धालु इसे पितरों की आत्मा की तृप्ति मानते हैं।

धार्मिक दृष्टि से जोड़कर देख रहे लोग

स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर के अन्य इलाकों में कौवों का न दिखना और एसडीएम कार्यालय में उनका एकत्रित होना कोई संयोग मात्र नहीं है। कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टि से भी जोड़ रहे हैं कि शायद यही स्थान पितरों की तृप्ति के लिए उपयुक्त स्थल बन गया है।

इस अनोखे नजारे को देखने के लिए आमजन भी यहां आ रहे हैं। कई लोग तो रोजाना परिसर में जाकर कौवों को भोजन कराते हैं और पितरों के आशीर्वाद की कामना करते हैं।

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