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डीएसओ वर्मा को दोषी माना, रिपोर्ट शासन सचिव को भेजी

-दो करोड़ के राशन घोटाले का मामला-घोटाले में राशनडीलर भी सहभागी
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डीएसओ वर्मा को दोषी माना, रिपोर्ट शासन सचिव को भेजी

श्रीगंगानगर.

दो करोड़ रुपए के राशन घाटाले में एपीओ किए गए जिला रसद अधिकारी डीएसओ सुनील वर्मा को दोषी पाया गया है। जिला कलक्टर ने इस मामले में जांच रिपोर्ट गुरुवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की शासन सचिव को भेज दी है। मुकर्जी नगर में रहने वाले महेन्द्र कुमार मेहता ने रसद विभाग में तत्कालीन प्रवर्तन अधिकारी सुनील वर्मा पर वार्ड नं. 23 (पुराना) में डीलरों के साथ मिलकर एक ही नम्बर के दो-दो राशन कार्ड बनाकर केरोसिन व गेहूं की कालाबाजारी करने का आरोप लगाते हुए शिकायतें की थी, जिनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

इस पर महेन्द्र मेहता ने प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। शिकायत को जयपुर मुख्यालय भेजकर जांच के आदेश दिए गए। जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने जयपुर से आदेश मिलने पर मामले की जांच अतिरिक्त जिला कलक्टर (सतर्कता) वीरेन्द्र वर्मा के सुपुर्द कर दी। एडीएम ने 17 जनवरी 2018 को जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंप दी। इस जांच में एडीएम (विजीलेंस) वीरेन्द्र वर्मा ने राशन कार्डों की दोहरी प्रवृष्टियां करने के लिए तत्कालीन प्रवर्तन निरीक्षक सुनील वर्मा को दोषी माना। जांच रिपोर्ट में संबंधित डीलर भी सहभागी पाए गए।


'वर्मा के पास कहने को कुछ नहीं
सात फरवरी को सुनील वर्मा ने कलक्टर को आवेदन देकर कहा कि उनका पक्ष नहीं सुना गया है और एकतरफा जांच हुई है। इस पर अतिरिक्त जिला कलक्टर (सतर्कता) को दोबारा जांच के लिए कहा गया है। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने इस जांच रिपोर्ट में साफ लिखा है कि एपीओ किए गए सुनील वर्मा को साक्ष्य पेश करने के लिए पांच मौके दिए गए। सुनवाई के लिए चार माह का समय दिया गया, लेकिन उसने हर बार और अवसर मांगा। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सुनील वर्मा ने अनावश्यक पत्राचार कर समय व्यतीत किया। इससे स्पष्ट है कि उनके पास कहने को कुछ नहीं है।


हनुमानगढ़ में भी दर्ज है प्राथमिकी
सुनील वर्मा ने जांच के दौरान स्वीकार किया कि राशन कार्ड गलती से दो रजिस्टर में दर्ज हो गए। वर्ष 2003 से 2015 तक वार्ड नं. 23 में 1200 से अधिक फर्जी राशन कार्डों के जरिए राशन सामग्री उठाए जाने का आरोप है। इस राशन सामग्री की कीमत दो करोड़ रुपए बताई गई है। एपीओ किए गए सुनील वर्मा पर हनुमानगढ़ में भी 10 करोड़ रुपए के राशन घोटाले में शामिल होने का आरोप है। एसीबी ने इस मामले में सुनील वर्मा समेत कई अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

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