श्रीगंगानगर। करीब तीन सालों से लगातार अग्रसेननगर प्रथम और दि्धतीय में रहने वाले करीब दो हजार लोगों को मालिकाना हक पाने के लिए नगर परिषद से इंतजार किया जा रहा है। डेढ़ साल पहले प्रशासन शहरों के संग अभियान शुरू हुआ तो यह मांग फिर से मुखर हुई। ऐसे में नगर परिषद प्रशासन ने जब इस अग्रसेननगर की फाइल और साइट प्लान को खंगाला तो यह जानकारी सामने आई कि पूरे एरिया को फिर से ले लाउट बनाने से ही इस समस्या का हल हो पाएगा। दरअसल पहले इस एरिया को बसाने के लिए भारतीय गृह निर्माण समिति के पास पट्टे का अधिकार था। सरकार ने इस निर्माण समिति से यह अधिकार वापस लिया तो नगर परिषद को इसके लिए अधिकृत किया गया। नगर परिषद के अधिकारियों का कहना था कि पहले जारी किए गए पट्टे मनमर्जी से किए गए थे, इस कारण इस एरिया में सड़कों का जाल मनमर्जी से बना हुआ है। नए सिरे से ले आउट का तरीका अपनाया।पूरे अग्रसेननगर प्रथम स्कीम का नए सिरे से ले आऊट बनाने के लिए एक प्राइवेट फर्म को अधिकृत कर दिया। यह ले लाऊट आया तो इस कॉलोनी में बसे कई लोगों की हवा ही निकल गई। सात ऐसे निर्मित मकानों को पार्क का हिस्सा दर्शाया गया है। इन मकानों में संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष तरसेम गुप्ता सहित कई व्यापारी भी शामिल है। गुप्ता भी इन व्यापारियों के साथ नगर परिषद के अधिकारियों के समक्ष पहुंचे और आपत्ति दर्ज कराई।
इधर, कृषि अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त मदन जोशी सहित कईयों ने यह भी आपत्ति लगाई कि उनके मकानों का साइज ही गलत दर्शाया है। किसी का चालीस फीट तो किसी को पचास फीट आकार का भूखंडधारक बताया है। कई भूखंडधारकों को ऑपन एरिया से बाहर दर्शाया गया है। एक पार्क की आधी भूमि में मकान है जबकि ले आउट में पूरा क्षेत्र में पार्क की भूमि है। इन लोगों ने यह भी आपत्ति दर्ज कराते हुए नगर परिषद प्रशासन से सवाल किया है कि यह ले लाउट किस विधि से और किस आधार पर गणना कर तैयार किया गया है। कईयों के मकान भी क्रमवाइज की बजाय आड़े तिरछे होने बताए गए है।
इस संबंध में नगर परिषद आयुक्त कपिल कुमार यादव ने लोगों से आपत्तियां मांगी है। इस सूचना के अनुसार एम्पावयर्ड कमे्टी की बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार अग्रसेननगर प्रथम स्कीम के कन्सल्टेंट सर्वेयर के माध्यम से संशोधित ले आउट प्लान नगर परिषद की ओर से तैयार कराया गया है। इस संशोधित ले आउट प्लान किसी भी व्यक्ति विशेष को केाई भी आपत्ति है तो सात दिन में कार्यालय में लिखित में दस्तावेज सबूत आपत्तित के साथ जमा कराया जा सकता है।