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देश को महफूज रखता है वीर-शहीदों का स्मरण

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war of sand dunes

देश को महफूज रखता है वीर-शहीदों का स्मरण

-श्रीकरणपुर के गांव नग्गी हुआ सेना का आयोजन
-पुष्पचक्र अर्पित कर दी शहीदों को श्रद्धाजंलि, ब्रिगेडियर सहित अन्य सैन्य अधिकारी हुए शामिल

श्रीकरणपुर.
जो देश अपने वीरों के शौर्य और बलिदान को याद रखता है। वहां कभी वीरों की कमी नहीं आती और दुश्मन भी उनसे हमेशा भयभीत रहता है। यह बात सेना की अमोघ डिवीजन के ब्रिगेडियर एचबी ग्रामोपाध्याय ने शुक्रवार को गांव नग्गी के निकट भारत-पाक सीमा पर हुए विजय दिवस समारोह में कही।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर ग्रामोपाध्याय ने कहा कि वीर-शहीदों का स्मरण देश को महफूज रखता है। उन्होंने गांव नग्गी के निकट रेतीले धोरों के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जांबाज भारतीय सैनिकों को सलाम किया। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की सेवा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसकी रक्षा के लिए हमें सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर रहना चाहिए। ब्रिगेडियर ग्रामोपाध्याय ने सन् 1971 के समय आसपास ग्रामीणों और कस्बावासियों की ओर सेे की गई सहायता को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि सीमावर्ती लोग भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत हैं। लोगों का यह जज्बा, उत्साह व हौंसला सेना को कभी हारने नहीं देता। उन्होंने इलाके के युवाओं को सेना में शामिल होने का आह्वान किया। कायक्रम के बाद बिग्रेडियर ग्रामोपाध्याय ने आम नागरिकों से मिलकर इलाके की समस्याओं की भी जानकारी ली।


बिगुल बजाकर चढ़ाए फूल...
नग्गी विजय दिवस पर सीमा पर बने शहीद स्मारक व मंदिर पर 1971 के धोरों की लड़ाई (सैंड ड्यून) के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। बिगुल बजाकर कार्यक्रम का आगाज किया गया। 1971 की लड़ाई के साक्षी रहे रिटार्यड सूबेदार धनवीरसिंह राघव के अलावा सेना की 15 इंफैन्ट्री अमोघ डिवीजन के लेफ्टिनेंट कर्नल रितेश लड्ढा, सूबेदार मेजर पुष्करसिंह भंडारी, 9 पैरा फील्ड रेजीमेंट के लेफ्टिनेंट दुर्गेश पाल, सूबेदार जरनैल सिंह, हवलदार बीबी पांडे व 4 पैरा के कप्तान निलेश नयन, जेसीओ देशबीर, बीएसएफ की 91 वीं वाहिनी के समादेष्टा देवेन्द्र सिंह, तहसीलदार अमरसिंह भनखड़ व सैन्यकर्मियों ने शहीदों के स्मारक पर पुष्पचक्र व श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान वे काफी भावुक दिखाई दिए। दो मिनट का मौन रखा गया। सैन्य अधिकारियों ने स्मारक परिसर में बने दुर्गा मंदिर मंदिर में धोक लगाई। मौके पर गांव नग्गी के सरपंच बलराजसिंह डीसी, पूर्व सरपंच रणजीतसिंह साहू, समीर साहू, वार्ड पंच शिवभगवान मेघवाल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


स्वर्गाश्रम में भी गूंजा भारत मां का जयघोष
गांव नग्गी में हुए आयोजन से पहले सुबह दस बजे सैन्य अधिकारियों ने यहां स्वर्गाश्रम स्थित स्मारक पर भी पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान यहां भारत मां का जयघोष गूंज उठा। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों के अलावा पूर्व पालिकाध्यक्ष जुगलकिशोर, भारत विकास परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी संदीप गोयल, मुकेश यादव, शशांक गुप्ता, मानव सेवा समिति संरक्षक डॉ.हजारीलाल मुटनेजा, तिलकराज बवेजा, चंद्रमोहन भसीन, पूर्व पार्षद सुभाष बिश्नोई, पार्षद रमेश दायमा, राजेन्द्र गुम्बर व अधिवक्ता राजीव वाट्स सहित अन्य नागरिक मौजूद रहे।


...इसलिए मनाते हैं नग्गी दिवस
वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना की करारी हार के बाद सीमा क्षेत्र शांत था। सीमा पर तैनात भारतीय सैना लौट चुकी थी। इसी दौरान युद्ध के दस दिन बाद पाक सेना नापाक इरादों के साथ भारतीय सीमा में घुसी और गांव 36 एच नग्गी के नजदीक रेतीले धोरों में करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (कोनी टिब्बा क्षेत्र) पर कब्जा कर लिया। इस पर भारतीय सेना की 4 पैरा बटालियन को क्षेत्र मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। आदेश की पालना में बटालियन के जाबांज सैनिकों ने योजना बनाकर 28 दिसम्बर 1971 को सुबह तीन बजे पाक सेना पर हमला बोला और तीन घंटे में ही पाक सेना को वापिस घर भेज दिया। युद्ध के दौरान पाक सेना ने तोप से 72 गोले बरसाए इससे बटालियन के 3 अधिकारी व 18 जवान शहीद हो गए। गांव नग्गी के पास धोरों में हुई लड़ाई भारतीय सेना में आज भी अविस्मरणीय है। इसका कारण है कि यह 1971 के भारत-पाक युद्ध समाप्त होने के बाद हुई। रेतीले धोरों में होने के कारण यह लड़ाई भारतीय सेना के इतिहास में सैण्ड ड्यून के नाम से दर्ज है। ऐसे रणबांकुरों की स्मृति में यहां एक स्मारक व मंदिर बनाया गया। सीमा से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह स्मारक आज भी युद्ध में प्राण न्योछावर कर चुके वीरों की याद दिलाता है। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष 28 दिसंबर को यह आयोजन किया जाता है।

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