2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक अनोखी कहानी: जब हिंदुस्तानी किसानों ने ट्रैक्टरों से दी पाकिस्तानी तोपों को चुनौती, देखें वीडियो

श्रीगंगानगर की करणपुर तहसील के गांव 36 एच नग्गी के पास।

2 min read
Google source verification
Indo-Pakistani War of 1971

Indo-Pakistani War of 1971

जयपुर। हिंदुस्तानी आर्मी की बहादुरी के तो क्या कहने, मगर आज हम बात कर रहे हैं उन साधारण से किसानों की जिन्होंने अपने ट्रैक्टरों के सहारे ही पाकिस्तानी की मौका परस्त आर्मी को तीन दिन तक नाकों चने चबाने के लिए मजबूर कर दिया, इतिहास में भले ही उन वीर किसानों की दास्तान दर्ज न हो, मगर राजस्थान का एक इलाका आज भी बहादुरी की इस दास्तान को याद करता है।

1971 का भारत पाक युद्ध समाप्त हुए दस दिन बीत चुके थे। भारतीय सीमा पर तैनात सेना लौट चुकी थी। किसी को भी यह गुमान नहीं था कि युद्ध में करारी हार होने के बाद पाकिस्तानी सेना भारतीय सीमा में घुसकर भूमि पर कब्जा करने का दुस्साहस भी कर सकती है। श्रीकरणपुर से हमारे सहयोगी प्रवीण राजपाल की रिपोर्ट।

लेकिन ऐसा हुआ श्रीगंगानगर की करणपुर तहसील के गांव 36 एच नग्गी के पास। पाकिस्तानी सेना नापाक इरादों के साथ भारतीय सीमा में घुसी और रेतीले धोरों से आच्छादित एक वर्ग किलोमीटर पर कब्जा जमा लिया। भारतीय सेना को इसका पता चला तो चार पैरा बटालियन को दुश्मन के कब्जे से भारतीय क्षेत्र को मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। दुश्मन का हमला इतना जल्दबाजी में हुआ कि भारतीय सेना तत्काल जवाब नहीं दे सकती थी, उसके बड़े हथियार और टैंक आदि बार्डर से जा चुके थे। उन्हें वापस बुलाने में वक्त लगने वाला था। ऐसे में श्रीकरणपुर और उसके आसपास रहने वाले किसानों ने न सिर्फ दूध— खाना आदि से सेना की मदद की, बल्कि दुश्मन को भरमाए रखने के लिए जो तरीका निकाला वो काबिले— तारीफ है।


युद्ध के दौरान सीमा पर भारतीय टैंक नहीं पहुंचने पर सैन्य अधिकारी चिंतित थे। ऐसे में एक ग्रामीण की सलाह पर आसपास गांवों से आए फर्गुसन ट्रैक्टरों के साइलेंसर निकालकर दो-तीन दिन तक पाकिस्तानी सेना को भ्रमित किया गया था। दरअसल साइलेंसर न होने से ये ट्रैक्टर बिल्कुल टेंकों की तरह आवाज करते और पाकिस्तानी सैनिकों को लगता कि टैंक आसपास आ चुके हैं, इसी डर से वे खंदकों में ही छिपे रहते और हमला नहीं करते।

आखिरकार भारत के टैंक भी पहुंच गए और बटालियन ने 28 दिसम्बर की सुबह चार बजे हमला बोला। दो घंटे की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना को फिर पराजय का मुंह देखना पड़ा और उसके सैनिक भाग खड़े हुए। हिंदुस्तान एक बार फिर जीत गया। रेगिस्तान के धोरों में हुए इस युदृध में हमारे भी 3 अधिकारी व 18 जवान शहीद हुए। लेकिन इस हमले को किसानों की सूझबूझ के बिना असफल किया जाना शायद और कठिन हो जाता।


बड़ी खबरें

View All

श्री गंगानगर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग