
रायसिंहनगर। भारत के आखिरी छोर पर स्थित है चक 37 पीएस। यह गांव भारत पाक सीमा पर हुई तारबंदी से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। रियासतकाल में बसे इस गांव के लोग बेहद पिछड़े होने के साथ ही अशिक्षा के शिकार भी है। गांव के लोग आजादी के बाद से ही अपने मताधिकार का प्रयोग तो करते आ रहे है लेकिन मतदान इस गांव के लोगों के लिए इतना आसान नहीं है।
ग्रामीणों को मतदान के लिए आज भी सड़क मार्ग से करीब आठ से दस किलोमीटर की दूरी तय कर खाटां स्थित मतदान केन्द्र पर जाते है। जनवरी माह की कड़ाके की ठंड के बीच होने वाले पंचायत चुनाव हों या फिर नवंबर दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव। हर बार इन ग्रामीणों को इस परेशानी से दो चार होना ही पड़ता है।
भीषण गर्मी में चल रहे लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए लोगों या तो रेतीले एवं गर्म धोरों को पार कर खाटां पहुंचना है वहीं कुछ लोग ट्रेक्टर ट्रालियां लेकर जरिए सड़क मार्ग खाटां पहुंचते है।
पैदल मतदान के लिए जाने वाले लोग करीब चार किलोमीटर लंबा उबड़ खाबड़ सफर तय कर मतदान केन्द्र पर पहुंचते है जबकि वाहनों पर जाने वाले मतदाताओं को दस किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर मतदान केन्द्र पर पहुंचना पड़ता है। इस गांव के लोगों का मतदान केन्द्र खाटां भारत पाक सीमा से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
जीपों व ट्रेक्टर ट्रालियों पर सवार होकर पहुंचे पोलिंग सेंटर
लोकसभा चुनाव में मतदान करने आ रहे ग्रामीणों ने बताया कि उन्होने अभी तक कोई ऐसा चुनाव नहीं छोड़ा जिसमें मतदान नहीं किया हो। मतदान के लिए चक 37 पीएस के ग्रामीणों को तीन गांवों चक 36 पीएस, 35 पीएस व 33 पीएस को पार कर खाटां पहुंचना पड़ता है। भीषण गर्मी में जीप पर सवार होकर आई एक महिला मतदाता ने बताया कि घर के बाकी काम तो हमेशा ही करते है।
लेकिन वोट डालने का मौका कई सालों में एक बार ही आता है। एक अन्य महिला ने बताया कि मतदान केन्द्र दूर है लेकिन घर का सारा काम छोड़कर मतदान के लिए जा रहे है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि हर बार 11 किलोमीटर की दूरी तय कर वोट डालने पहुंचते है।
Updated on:
06 May 2019 01:03 pm
Published on:
06 May 2019 01:03 pm
