
गंगनहर (फोटो- पत्रिका)
श्रीगंगानगर: गंगनहर में पानी की मात्रा और कौन सी नहर खुली है और कौन सी नहर बंद, इसकी जानकारी सिंचाई मित्र एप से लेने वाले किसान अब पानी की बारी की पर्ची भी मोबाइल पर देख सकेंगे। जल संसाधन विभाग के किसानों से जुड़े कार्यों के डिजिटलीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए जिला प्रशासन अब ई-बारी पोर्टल लांच करने की तैयारी में है।
बता दें कि ई-बारी के बाद ई-आबियाना पोर्टल पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह दोनों पोर्टल ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगे। पानी की बारी की पर्ची लेने के लिए किसानों को अब भटकना नहीं पड़ेगा। अपने मोबाइल पर ही वह बारी का गणित समझ सकेंगे।
गंगनहर प्रणाली में पानी की बारी की हस्तलिखित पर्ची देने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पहले यह पर्ची सिंचाई पटवारी तैयार करते थे। अब इसे नहर अध्यक्ष तैयार कर किसानों को देते हैं। पानी की बारी की पर्ची साल में दो बार 15 अप्रैल से 30 मई तक और 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक तैयार कर वितरित की जाती है।
इस वर्ष अप्रैल में किसानों को पानी की बारी की पर्ची ई-बारी पोर्टल पर मिलेगी। अधीक्षण अभियंता धीरज चावला ने बताया कि विभाग ने लगभग 73,442 किसानों के सत्यापित रिकॉर्ड को सफलतापूर्वक सिस्टम में दर्ज कर लिया है।
पानी की बारी की पर्ची बनाने के काम में गड़बड़ी की शिकायतें जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता और मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर लगातार होने के कारण बाराबंदी ऑनलाइन करने का निर्णय किया गया। पानी की बारी में मनमर्जी से बदलाव की प्रवृत्ति पर भी बाराबंदी ऑनलाइन होने से अंकुश लगेगा। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (निक) श्रीगंगानगर ने इस पोर्टल को तैयार किया है।
बाराबंदी ऑनलाइन होने के बाद पानी की बारी को लेकर मिलने वाली शिकायतों में निश्चित रूप से कमी आएगी। पारदर्शिता से पानी का बंटवारा होने पर बारी को लेकर किसानों के आपसी झगड़े भी नहीं होंगे। ई- बारी पोर्टल का शुभारम्भ समारोह पूर्वक किया जाएगा।
-डॉ. मंजू, जिला कलेक्टर श्रीगंगानगर
Published on:
26 Feb 2026 02:28 pm
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