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श्रीगंगानगर: अनूपगढ़ में अवैध बंधों से बहा पानी, खेतों की फसलें बर्बाद; किसानों का आरोप- जिम्मेदारों पर नहीं हो रही कार्रवाई

किसान सात दिनों से दिन-रात तट बंधों पर पहरा दे रहे हैं। कभी फावड़ा उठाते, कभी थैलों से मिट्टी भरते तो कभी रेत की बोरियां लगाते, ताकि पसीने से सींची फसल को बचा सके। लेकिन जैसे-जैसे पानी का दबाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनकी सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं।

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Anupgarh Farms Crops Destroyed

पुल के नीचे से गुजरता घग्घर का पानी (फोटो- पत्रिका)

अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर): घग्घर नदी का पानी इन दिनों मुसीबत बनकर भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों के पास बह रहा है। निचला इलाका होने से नदी में पीछे से आ रहा पानी यहीं दबाव बनाकर किसानों की ओर से फसलों को बचाने के लिए बनाए गए बंधों को धराशायी कर फसलों को डुबो रहा है।


पत्रिका संवाददाता ने शुक्रवार को प्रभावित गांवों का दौरा किया तो किसान मायूस नजर आए। कइयों की आंखों से आंसू छलक पड़े तो कोई अपना माथा पकड़कर चुपचाप आसमान की ओर ताकने लगा। किसानों ने बताया कि घग्घर बहाव क्षेत्र में बने अवैध बंधों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।


किसानों का आरोप था कि अवैध बंधे बनाने वालों के खिलाफ ने प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। किसानों का दर्द सिर्फ अपनी फसल तक सीमित नहीं है। अपनी फसल बर्बाद हो जाने के बाद वे पड़ोसी खेत के किसानों की फसल बचाने में जुटे हैं।
बलविंदर सिंह उर्फ बब्बू बहोलिया ने बताया कि 89 जीबी के पुल के पास पानी दो इंच कम हुआ है, लेकिन अभी भी पानी पुल के बराबर बह रहा है। खतरा टला नहीं है। हर किसान को अपने तटबंधों पर नजर रखनी जरूरी है। जरा सी चूक बड़ी तबाही ला सकती है।


किसानों ने बताई समस्या की जड़


किसान गुरदेव सिंह ने बताया कि घग्घर में पानी का दबाव पहले भी कई बार बढ़ा है, लेकिन इस तरह की स्थिति कभी नहीं बनी। असली वजह है भारत-पाक सीमा पर तारबंदी के पीछे बनाई गई नई दीवार। इस दीवार में सायफन रखे गए हैं ताकि पानी निकल सके, लेकिन पानी पूरे वेग से गुजरने की बजाय सायफनों से होकर धीमी गति से गुजरता है। यही कारण है कि नदी का पानी तटबंधों पर सीधा दबाव डाल रहा है, जिससे बंधे दरक रहे हैं। उन्होंने बताया के नई बनाई गई दीवार को तोड़ा नहीं गया तो हालात बेकाबू हो जाएंगे।


पाइपों से नहीं निकलता पानी


गांव 27 ए के किसान सर्वजीत सिंह ने बताया कि उनकी जमीन नाली क्षेत्र में पड़ती हैं। उसने अपना बंधा नाली की धार से चार बीघा हटकर सही जगह बनाया था। प्रशासन ने उनका बंधा तो तोड़ दिया, नाजायज बंधा नहीं तुड़वाया। किसान का कहना था कि घग्घर नदी का पानी जब बॉर्डर पर फेंसिंग को छूने लगा तो उसे सुरक्षित करने के लिए बंधे तोड़ते गए, ताकि फेंसिंग सुरक्षित रहे।


नई फेंसिंग में निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं दी गई। पानी निकासी के लिए सायफन रखे गए, लेकिन पाइपों से नदी का पानी नहीं निकलेगा। भारतीय किसान संघ के प्रांत उपाध्यक्ष जसवंत सिंह चन्दी ने पानी के दबाव को कम करने को फेसिंग के लिए बनी दीवार को तोड़ना होगा। इसके अलावा घग्घर नदी का पानी सूखने के बाद पुल बनाया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में ऐसे स्थिति दोबारा नहीं आए।


निकासी की तरफ ध्यान नहीं


किसान कश्मीर कंबोज ने बताया कि अधिकारियों की गलत नीतियों के कारण इलाका बर्बाद हो रहा है। प्रशासन ने गुरुवार को बंधे तुड़वाए तो सैकड़ों बीघा लहलहाती फसल चौपट हो गई है। जिधर से पानी की निकासी होनी है, इधर किसी का ध्यान नहीं है। इस किसान का कहना था कि छह चकों के किसानों के साथ नइंसाफी हुई है।


किसानों को नुकसान जैसी कोई बात नहीं। फसलें उन किसानों की डूबी हैं, जिन्होंने नदी के बहाव क्षेत्र में काश्त की हुई थी। प्रशासन ने अवैध बंधों को हटाने की कार्रवाई की है।
-डॉ. मंजू, जिला कलेक्टर, श्रीगंगानगर

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