
श्रीगंगानगर में यूआईटी ने बिना सूचना दिए आठ दिन पहले उतरा 110 फीट ऊंचा तिरंगा, अब तक गायब
श्रीगंगानगर। करीब आठ महीने पहले नगर विकास न्यास प्रशासन ने सुखाडिय़ा सर्किल भारत माता चौक पर 110 फीट ऊंचा तिरंगा ध्वज लगाया गया था, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिन 14 अगस्त 2018 को मानव श्रृंखला बनाने के कार्यक्रम से ऐनवक्त पर यह इलाके में सबसे ऊंचे तिरंगा ध्वज फरहाया गया तब क्षेत्रवासी इस ध्वज को देखकर झूम उठे थे लेकिन पिछले आठ महीने की समय अवधि में पांच माह तो यह ध्वज तो नगर विकास न्यास और ठेकेदार की मनमर्जी का दंश झल रहा है, ठेकेदार के मन में जब आया तब यह ध्वज लगा दिया जाता है। जब मन आता है तब उतार दिया जाता है।
भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले महीने से बॉर्डर पर चल रहे तनाव को देखते हुए इस तिरंगे की अहमियत और भी बढ़ जाती है लेकिन नगर विकास न्यास प्रशासन ने इसकी अनदेखी कर दी। यहां तक कि इलाके के जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी सिर्फ अपनी विज्ञप्ति या फोटो खिंचवाने के लिए भारत माता चौक पर एकत्र होते है लेकिन तिरंगे ध्वज के फहराने या नहीं फहराने के संबंध में प्रतिक्रिया करने से परहेज करते है।
ज्ञात रहे कि भारत माता चौक पर स्थापित किए गए इस एक सौ फीट ऊंचे तिरंगे को लेकर अड़चन शुरू से बन गई है। 16 अगस्त 2018 को जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी का निधन हुआ तो राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। तब इस तिरंगे को आधा झुकाने के लिए जब ठेकेदार गया तो इसमें यह सिस्टम ही नहीं था कि इसे आधा झुकाया जाएं। ऐसे में काफी मशक्कत के बावजूद यह आधा नहीं झुका तो ध्वज ही उतार लिया गया। यह ध्वज दस दिन बाद फिर से लगाया तो पोल में अड़चन आ गई। इस पोल में लगी मशीन से ध्वज ऊपर नहीं गया तो यह प्रक्रिया एक महीने के लिए बंद कर दिया गया।
दरअसल, पिछले साल नगर विकास न्यास प्रशासन ने इस 110 फीट ऊंचे तिरंगे ध्वज को स्थापित करने के लिए साढ़े ग्यारह लाख रुपए का बजट खर्च किया है। अगले दो साल तक इसके रखरखाव के लिए ठेका फर्म को अधिकृत किया गया है। दिल्ली से मंगवाए गए इस सिस्टम में बार बार खराबी आती रही है।
आठ महीने की समय अवधि में महज पांच महीने तो ध्वज को फराया ही नहीं गया है। इस ध्वज को रात के समय आमजन को दिखाई दे, इसके लिए ध्वज के लिए बनाए गए पोल के आसपास दो और पोल चार चार सौ वॉट की लाइटिंग के लिए स्थापित किए लेकिन आज तक ये लाइटिंग सिस्टम कभी ऑन ही नहीं हो पाए है।
इधर, नगर विकास न्यास के कार्यवाहक सचिव महेश गोयल का कहना है कि बरसाती मौसम के कारण उतारा बरसाती मौसम में ध्वज का कपड़ा गीला होने के कारण भारी हो जाता है।
हवा चलने से यह भारी ध्वज गिरने या क्षतिग्रस्त होने की अधिक संभावना रहती है। ऐसे में इस ध्वज को उतरवाया गया है। अब मौसम साफ होने पर इसे दुबारा फहराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। बाघा बॉर्डर पर लगातार ध्वज फहराने के दौरान किस तकनीक का इस्तेमाल करते है वह मेरी जानकारी में नहीं है।
Updated on:
18 Mar 2019 09:40 pm
Published on:
18 Mar 2019 09:40 pm
