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इस राज्य में दलितों का मंदिरों में प्रवेश हुआ BAN, 250 परिवारों ने धर्म परिवर्तन का लिया फैसला

एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'एक सुझाव आया था कि दलितों को दिन में पूजा करने दी जाए, मगर वे पूरे 24 घंटे चाहते हैं। बातचीत चल रही है।'

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Nakul Devarshi

Jul 28, 2016

तमिलनाडु के 250 दलित परिवार स्‍थानीय मंदिरों में प्रवेश नहीं दिए जाने से आक्रोशित हैं। पजहनंगकल्‍लीमेडु और नागपल्‍ली गांव के दलित परिवारों का कहना है कि अब वे धर्म परिवर्तन कर इस्‍लाम अपनाने की सोच रहे हैं। नागपट्ट‍िनम जिले के पजहनंगकल्‍लीमेडु गांव के 180 दलित परिवार हर साल मंदिर में होने वाले पांच दिवसीय समारोह में एक दिन अनु‍ष्‍ठान करना चाहते हैं। लेकिन उन्‍हें इजाजत नहीं दी जा रही है। गांव के 6 दलितों ने पहले ही इस्‍लाम कबूल लिया है।

स्‍थानीय नागरिकों के मुताबिक, तमिलनाडु तौहीद जमात ने गांव में कुरान की प्रतियां बांटी थीं, इसके अलावा एक ईसाई मिशनरी ने भी गांववालों से संपर्क किया था। कुछ हिंदू संगठन दलितों से धर्म परिवर्तन न कराने की गुजारिश कर रहे हैं।

तटीय क्षेत्र में बसे पजहनंगकल्‍लीमेडु में करीब 400 परिवार रहते हैं, जिनमें से 180 दलित हैं। ज्‍यादातर हिंदू पिल्‍लाई समुदाय के हैं, जो परंपरागत रूप से जमींदार होते हैं। दलित पार्टी ने नेता ने कहा कि जब पुलिस और प्रशासन उन्‍हें भद्र कालीअम्‍मन मंदिर में पूजा का अधिकार दिलाने में नाकाम रहा, तो गांव के युवकों ने इस्‍लाम अपनाने की सलाह दी।

मामले में जिलाधिकारी के पास कई अपील पड़ी हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'एक सुझाव आया था कि दलितों को दिन में पूजा करने दी जाए, मगर वे पूरे 24 घंटे चाहते हैं। बातचीत चल रही है।'

हालांकि टीएनटीजे के बी. अब्‍दुल रहमान का कहना है कि गांववालों का फोन आने के बाद वे वहां गए। उन्‍होंने कहा, कुछ गांववालों के फोन आने के बाद, हमारे वालंटियर वहां गए। वे धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे, लेकिन वह इतनी आसानी से नहीं किया जा सकता क्‍योंकि इस्‍लाम जीने का तरीका है और गुस्‍से में आकर उसे नहीं कबूला जा सकता। हमने उनसे कहा कि वह पहले धर्म के बारे में पढ़ लें और फिर हमारे पास आएं।

'भेदभाव खत्‍म' करने का इकलौता रास्‍ता धर्म परिवर्तन

इस गांव से 240 किलोमीटर दूर करूर के नागपल्‍ली गांव में भी कुछ ऐसी ही कहानी है। जहां के 70 दलित परिवारों को लगता है कि 'भेदभाव खत्‍म' करने का इकलौता रास्‍ता धर्म परिवर्तन है। गांव के मंदिर ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष पी. वेट्रिवेल का कहना है कि 'गांव में कई मंदिर थे, लेकिन हमें (दलितों) को एक मंदिर अलग से बनाना पड़ा। लेकिन पिछले दो सालों में, जब से मेरे पिता की मौत हुई है, श्रीलंका से लौटकर आने वाले हिंदू परिवारों ने हमें मंदिर में जाने से रोक दिया और उस पर कब्‍जा करने की कोशिश की। न तो पुलिस, न ही सरकार ने हमारी मदद की।