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NEET री-एग्जाम से पहले टूटी हिम्मत, नागपुर की छात्रा ने सुसाइड नोट में बयां किया दर्द, लिखा- ‘पहले जैसे फिर नहीं दे पाऊंगी परीक्षा’

NEET Exam Controversy: नागपुर में 20 साल की नीट अभ्यर्थी की आत्महत्या के बाद परिवार ने पेपर लीक और री-एग्जाम की आशंका को इसकी वजह बताया है। छात्रा की किताब में उसका लिखा हुआ सुसाइड नोट मिला है।

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NEET Aspirant Suicide

NEET री-एग्जाम से पहले नागपुर में छात्रा ने की आत्हत्या (Photo- X @nabilajamal_)

NEET Aspirant Suicide: नागपुर में रहने वाली 20 साल की एक नीट छात्रा की आत्महत्या के मामले में अब नया खुलासा हुआ है। परिवार का कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा दोबारा होने की खबरों ने उसे काफी परेशान कर दिया था। छात्रा की मौत के करीब 14 दिन बाद जब परिवार गांव लौटा तो उसकी किताब में एक नोट मिला। परिजनों का दावा है कि इसी नोट से पता चला कि नीट परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता और टेंशन की वजह से वह अंदर ही अंदर टूट चुकी थी।

सुसाइड नोट में क्या लिखा?

परिवार वालों के अनुसार छात्रा की किताब में एक नोट मिला, जिससे उसकी परेशानी का पता चला। नोट में उसने लिखा था कि उसे पूरा भरोसा था कि नीट में उसके अच्छे नंबर आएंगे, लेकिन अगर दोबारा एग्जाम हुआ तो वह पहले जैसा प्रदर्शन कर पाएगी या नहीं, इसे लेकर कोई गारंटी नहीं है। उसने अपने मम्मी-पापा से माफी भी मांगी और लिखा कि वह उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। परिजनों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद वह बहुत उदास हो गई थी, लेकिन उनको उसकी मानसिक स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था।

परिवार ने कर्ज लेकर कराई थी पढ़ाई

छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। पढ़ाई में भी वह बहुत होशियार थी और अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही थी। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं ती फिर भी उन्होंने उसकी पढ़ाई और कोचिंग के लिए लाखों रुपये का कर्ज लिया। उन्होंने बताया कि नीट का पेपर देने के बाद वह बहुत खुश थी और उसे पूरा भरोसा था कि इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में चयन हो जाएगा।

परीक्षा विवाद के बाद बदल गया था व्यवहार

परिवार वालों का कहना है कि पेपर लीक और नीट दोबारा होने की खबरें आने के बाद उनती बेटी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। पहले वह घर में सबसे हंसकर बात करती थी, लेकिन बाद में काफी चुप-चुप रहने लगी। उसने लोगों से मिलना-जुलना और बातें करना भी कम कर दिया था।

शिक्षा व्यवस्था से उठा भरोसा

छात्रा के पिता ने आगे कहा कि अब उनका शिक्षा व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। उन्होंने यहां तक कहा कि उनका छोटा बेटा, जो नौवीं कक्षा में पढ़ता है, उसे भी शायद आगे पढ़ाई न कराएं। उनका मानना है कि अगर मेहनत के बाद भी बच्चों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़े तो उन्हें खेती जैसे काम में लगाना बेहतर है। वहीं, कांग्रेस युवा अध्यक्ष याह घंघोरिया ने परिवार से मुलाकात कर दुख जताया और पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज समेत हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में वे परिवार के साथ खड़े हैं।

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