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CG News: अस्पताल में दर्दनाक घटना! समय पर रेफर नहीं करने से मां-बच्चे की मौत, मचा हड़कंप

CG News: अस्पताल में जटिल प्रसव के दौरान समय पर रेफर नहीं करने के आरोप में गर्भवती महिला और नवजात की मौत हो गई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

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अस्पताल में दर्दनाक घटना (photo source- Patrika)

अस्पताल में दर्दनाक घटना (photo source- Patrika)

CG News: सुकमा जिले के गादीरास अस्पताल में प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान सोड़ी सोमड़ी (पति गंगा) के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि समय पर बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं किए जाने के कारण यह दर्दनाक घटना हुई, जिसमें मां और बच्चे दोनों की जान चली गई।

CG News: महिला को समय पर रेफर नहीं किया

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह 8 से 9 बजे के बीच महिला को मितानिन के माध्यम से अस्पताल लाया गया था। प्रसव के दौरान बच्चा फेस प्रेजेंटेशन में था, जिससे मामला जटिल हो गया था। इसके बावजूद लंबे समय तक सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया जाता रहा। सुबह करीब 11 बजे तक स्थिति में सुधार नहीं होने के बाद भी महिला को समय पर रेफर नहीं किया गया।

अस्पताल प्रबंधन ने किया बचाव

वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मामला जटिल था और बच्चा फेस प्रेजेंटेशन में होने के कारण प्रसव में कठिनाई आई। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इस घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और गंभीर मामलों में त्वरित निर्णय लेने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

CG News: पहले से ही कमजोर थी

बताया जा रहा है कि महिला का हीमोग्लोबिन तीन माह पहले ही 8.2 था, जो सामान्य से कम है। इसके बावजूद डिलीवरी से पहले आवश्यक जांच और जोखिम का सही आकलन नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

अत्यधिक रक्तस्राव

परिजनों का आरोप है कि महिला की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज किया गया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और अंतत: उसकी मौत हो गई। नवजात भी जीवित नहीं बच सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही निर्णय लिया जाता, तो कम से कम एक की जान बचाई जा सकती थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, “फेस प्रेजेंटेशन” जैसे जटिल प्रसव मामलों में तुरंत विशेषज्ञ हस्तक्षेप और उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफरल जरूरी होता है। यदि समय पर उचित निर्णय नहीं लिया जाए, तो मां और नवजात दोनों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने, डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और रेफरल सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।