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अदालत ने ठुकराई पिता व आरोपी की मांग, रेप पीड़िता को भेजा नारी निकेतन

रेप पीड़िता किशोरी ने अपने ही घर वालों से जान का खतरा बताया और आरोपी ने उसे पत्नी बताते हुए अपने घर ले जाने की कोर्ट से मांग की लेकिन कोर्ट ने मांग खारिज कर दी।

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Court rejects plea of father and accused

अदालत ने ठुकराई पिता व आरोपी की मांग, रेप पीड़िता को भेजा नारी निकेतन

सुलतानपुर. रेप पीड़िता किशोरी ने अपने ही घर वालों से जान का खतरा बताया और आरोपी ने उसे पत्नी बताते हुए अपने घर ले जाने की कोर्ट से मांग की। स्पेशल जज पाक्सो एक्ट प्रशांत मिश्र ने पीड़िता को अवयस्क मानते हुए अभियुक्त एवं उसके परिजनों की सुपुर्दगी में दिया जाना उचित न मानते हुए दोनों की अर्जी निस्तारित कर पीड़िता को बालिग होने तक नारी निकेतन अयोध्या में रखने का आदेश दिया है।

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जानिए क्या है पूरा मामला

मामला कुड़वार थाना क्षेत्र के बहलोलपुर गांव से जुड़ा है। जहां के रहने वाले रोहित के खिलाफ अभियोगी ने अपनी नाबालिग पुत्री को बहलाकर भगा ले जाने के आरोप में करीब एक वर्ष पूर्व मुकदमा दर्ज कराया। कई महीनों तक आरोपी पीड़िता को लेकर अपने साथ रखा। पुलिस पर कोर्ट ने सख्ती बरती तो हरकत में आए दरोगा ने पीड़िता की आरोपी रोहित के कब्जे से बरामदगी की। पीड़िता के बयान व मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। मामले में रोहित को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

इस मामले में उसके मामा रामरतन का भी नाम सामने आया। जिसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। मामले में पीड़िता के पिता की तरफ से सुपुर्दगी अर्जी पूर्व में दी गई थी लेकिन पीड़िता अपने घर वालों के साथ जाने को तैयार नहीं हुई। नतीजतन कोर्ट ने उसे नारी निकेतन अयोध्या भेज दिया। तब से वह नारी निकेतन में ही है।

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पीड़िता ने पिता के साथ जाने से किया मना

मामले में आरोपी की तरफ से पीड़िता को वयस्क बताते हुए उसे बतौर पत्नी साथ रखने के लिए अपने साथ रखने के लिए अर्जी दी गई, वहीं पीड़िता के पिता के जरिए आरोपी की अर्जी पर आपत्ति जताते हुए उसे खारिज किये जाने एवं पीड़िता को अवयस्क बताकर अपने संरक्षण में देने की मांग की गई। मामले में सुनवाई के दौरान नारी निकेतन से तलब हुई पीड़िता से कोर्ट ने उसकी मर्जी जाननी चाही तो उसने अपने घर वालों से जान का खतरा बताते हुए उनके साथ जाने से इंकार कर दिया। वहीं आरोपी की तरफ से पड़ी अर्जी पर किसी प्रकार का विरोध नहीं जाहिर किया।

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परिवारीजनों से जान का खतरा

दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात स्पेशल जज प्रशांत मिश्र ने मौजूद साक्ष्यों एवं हाईस्कूल के अंकपत्र में अंकित पीड़िता की जन्म तिथि मार्च 2003 के अनुसार उसे अवयस्क मानते हुए आरोपी की तरफ से पड़ी रिलीज अर्जी को निस्तारित करते हुए उसके सुपुर्दगी में देने का आदेश नहीं दिया, वहीं पीड़िता के जरिए अपने ही परिवारीजनों से जान का खतरा होने की बात रखने के चलते पिता की तरफ से भी पड़ी रिलीज अर्जी को निस्तारित कर उसके भी पक्ष में आदेश नहीं जारी किया। अदालत ने दोनों पक्षों की सुपुर्दगी में पीड़िता को दिया जाना उचित न मानकर उसे बालिग होने तक नारी निकेतन अयोध्या में रखने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से दोनों पक्षों को झटका लगा है।