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बैंक अधिकारी बनकर की थी 18 लाख की ऑनलाइन ठगी, कोर्ट ने 3 आरोपियों को दी 7 साल सश्रम कारावास की सजा

Online fraud: एक व्यक्ति द्वारा 2 साल पहले बिजली बिल का ऑनलाइन भुगतान करने के बाद मैसेज नहीं आने पर बैंक अधिकारियों ने बताया था कस्टमर केयर का नंबर, उक्त नंबर पर कॉल करने के बाद हुआ था ठगी का शिकार

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बैंक अधिकारी बनकर की थी 18 लाख की ऑनलाइन ठगी, कोर्ट ने 3 आरोपियों को दी 7 साल सश्रम कारावास की सजा

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सूरजपुर. Online fraud: अक्टूबर 2021 में खुद को बैंक अधिकारी बताकर सूरजपुर जिले के लटोरी निवासी एक युवक के मोबाइल पर अज्ञात शख्स द्वारा एक लिंक भेजा गया था।फिर मोबाइल ओटीपी के माध्यम से उसके खाते से 18 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। रिपोर्ट पर पुलिस ने मामले में झारखंड से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को तीनों आरोपियों को न्यायालय द्वारा अलग-अलग धारा के तहत 7 साल व 3-3 साल के सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।


सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत लटोरी निवासी प्रार्थी विचित्र विश्वास का इंडसइंड बैंक शाखा अंबिकापुर में तीन बचत एवं एक चालू खाता था। 13 अक्टूबर 2021 को प्रार्थी द्वारा अपने मोबाइल से बिजली बिल का भुगतान किया गया, जिसका भुगतान संबंधी मैसेज मोबाइल पर प्राप्त नहीं हुआ।

बैंक अधिकारियों द्वारा कस्टमर केयर नंबर बताया गया। इसके बाद प्रार्थी द्वारा उक्त नंबर पर फोन लगाने पर फोन नहीं लगा, कुछ देर पश्चात प्रार्थी के मोबाइल पर अज्ञात द्वारा स्वयं को बैंक अधिकारी बताते हुए जानकारी प्रदान करने हेतु लिंक भेजा गया।

ओटीपी नंबर प्रदान करते ही विचित्र विश्वास के खाते से लगभग 18 लाख रुपए आरोपियों द्वारा धोखाधड़ी करते हुए आहरित कर लिए गए। मामले की रिपोर्ट पर पुलिस चौकी लटोरी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 419 व आईटी एक्ट की धारा 66 डी के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की गई।

विवेचना पश्चात लटोरी पुलिस द्वारा आरोपी मोहम्मद जसीम अंसारी, कुतुबुल अंसारी निवासी जिला गिरीडीह झारखंड एवं साजिद अंसारी निवासी देवघर झारखण्ड को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 14 नग एटीएम, 4 नग मोबाइल, कई सिम, धोखाधड़ी की रकम करीब 1 लाख रुपए, एक देशी कट्टा जब्त किया गया था।

प्रकरण के विवेचक तत्कालीन लटोरी चौकी प्रभारी सुनील सिंह द्वारा प्रकरण में साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र न्यायालय सूरजपुर में पेश किया गया था।

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मिला 7 साल का सश्रम कारावास
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सूरजपुर के यहां हुई। प्रकरण का संचालन जिला अभियोजन अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी द्वारा किया गया।

न्यायालय ने मामले की सुनवाई में सभी आरोपियों को दोषी पाते हुए धारा 420 में 7 साल का सश्रम कारावास, 419 में 3 साल सश्रम कारावास, धारा 66 डी आईटी एक्ट में 3 साल का सश्रम कारावास एवं धारा 25 आयुध अधिनियम में 3 साल के सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया है।