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गांव वालों ने शहर में निकाली रैली, कहा- किसी भी हालत में नहीं खुलने देंगे कोल माइंस

Protest of coal mines: ग्रामीणों का कहना कि जन चौपाल लगाकर कलेक्टर स्वयं गांव में उपस्थित हों तथा अन्य राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में ग्रामवासियों की समस्याओं से अवगत हों एवं उन्हें पूरा करने का दें आश्वासन

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Protest against coal mines

Rally by villagers

सूरजपुर. Protest of coal mines: सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत जोबगा में एसईसीएल की केतकी अंडर ग्राउंड खदान खुलने का क्षेत्र के ग्रामीणों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि एसईसीएल द्वारा पूर्व में चली आ रही गांव की समस्याओं का निराकरण तो किया ही नहीं गया है, जबकि 18 साल से हम आवेदन देते आ रहे हैं। इसके बाद भी कॉलरी खोलने की तैयारी कर ली गई है। इस मामले में नौकरी व मुआवजे की मांग को लेकर जोबगा के ग्रामीणों ने सूरजपुर नगर में रैली निकाली और कलेक्टर को एक ज्ञापन दिया।


ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम पंचायत जोबगा में एसईसीएल केतकी अण्डर ग्राउण्ड खदान प्रारंभ होने की स्थिति में है परंतु ग्रामवासियों की किसी भी मांग को पूरा नहीं किया गया है। जबकि ग्रामवासियों द्वारा विगत कई वर्षों से आवेदन, निवेदन, धरना, हड़ताल एवं चक्का जाम के माध्यम से प्रशासन को समय-समय पर अपनी मांगों से अवगत कराते रहे हैं। लेकिन लगभग 18 वर्षों से ग्रामीणों द्वारा दिए जा रहे आवेदन पर विभाग मौन है।

वर्तमान में माइंस खुलने की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गर्इं हैं। यहां तक कि ग्राम पंचायत की मूलभूत आवश्यकताओं की भी पूर्ति नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की पुल, पुलिया सडक़ का चौड़ीकरण, धूल, कोयले का डस्ट एवं बड़ी-बड़ी वाहनों के चलने से रोड में गिरने वाले कोयले की उचित व्यवस्था की जाए।

ग्राम पंचायत जोबगा में जन चौपाल लगाकर कलेक्टर स्वयं उपस्थित होकर अन्य राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में ग्रामवासियों की समस्याओं से अवगत हों एवं उन्हें पूरा करने का आश्वासन दें।

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नहीं खुलने देंगे खदान
ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है हम किसी भी स्तर पर केतकी खदान को प्रारंभ नहीं होने देेंगे। यदि 15 दिवस के अन्दर जन चौपाल लगाकर हमारी समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो हम धरने पर बैठ जाएंगे। सरपंच संत सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण पहुचे थे।

इस दौरान धनी पंडो, आनंद राम, मुरली सिंह, परसोत्तम, टेकराम, बाबूलाल, फुलेश्वर, सुरेंद्र, सुरेश, मुन्नी बाई, चंपा देवांगन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।