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CG Impactful story : संतान से अलग होते ही फूट-फूटकर रोई विक्षिप्त मां की ममता, कामांधों ने बनाया था हवस का शिकार

पत्रिका की खबर पर युवती का होगा राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय सेंदरी में इलाज, नवजात पलेगा सेवाभारती मातृछाया में
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सुरजपुर

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Ram Prawesh Vishwakarma

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Updated: 25 Feb 2018, 6:10 PM IST

Newborn

Newborn in Matrichhaya

सूरजपुर. हवस के दरिंदों की करतूत से अविवाहित विक्षिप्त युवती ने चौथी संतान को जन्म दिया था। सूरजपुर के जिला चिकित्सालय में रखकर उपचार कराने संबंधी मामले को पत्रिका द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद हरकत में आये जिला प्रशासन ने युवती के समुचित इलाज और नवजात के सरंक्षण की पहल शुरू कर दी है। विक्षिप्त युवती को बिलासपुर के सेंदरी में और नवजात शिशु को मातृछाया भेजा गया है।

मातृछाया में जब नवजात को विक्षिप्त मां से अलग किया जा रहा था तो उसकी ममता जाग गई। वह फूट-फूटकर रोने लगे। वहीं इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं, युवती व उसके बच्चे के स्वास्थ्य व देखरेख की पहल तो हो गई लेकिन युवती का दैहिक शोषण करने वाले दरिंदों की पतासाजी हेतु पुलिस ने कोई जांच शुरू नहीं की है, इतने गंभीर मामले में पुलिस की निष्क्रियता समझ से परे है।


गौरतलब है कि पत्रिका ने अपने 2२ फरवरी के अंक में विक्षिप्त युवती से जुड़े विभिन्न पहलुओं को 'कामांधों ने विक्षिप्त युवती को भी नहीं बख्शाÓ शीर्षक से समाचार का प्रकाशन प्रमुखता किया था। समाचार प्रकाशन के बाद कलक्टर केसी देवसेनापति ने महिला बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण इकाई, सखी वन स्टाप सेन्टर, चिकित्सा विभाग एवं पुलिस विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किये थे।

जिला न्यायालय ने भी समाचार और मामले को संज्ञान में लिया है। जिला प्रशासन की पहल पर विक्षिप्त युवती और उसकी नवजात संतान को न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर बिलासपुर भेज दिया गया है।


बच्चे से अलग होते ही विचलित हुई विक्षिप्त मां
नवजात शिशु और विक्षिप्त युवती को बिलासपुर पहुंची संयुक्त टीम के सदस्यों ने बताया कि जब विक्षिप्त मां को राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय सेंदरी में भर्ती कर उसके नवजात बच्चे को मातृछाया ले जाने के लिए अलग किया गया तो विक्षिप्त युवती के अंदर मां की ममता स्पष्ट देखने को मिली। वह बच्चे को कहीं न ले जाने की अपील करती रही, लेकिन शासनादेश से बंधी टीम ने बच्चे को मां से अलग कर मातृछाया में जमा कर दिया। इसके बाद से विक्षिप्त युवती का रो-रोकर बुरा हाल है।


मातृछाया में मिला बच्चे को नाम
न्यायालय और जिला प्रशासन के आदेश पर विक्षिप्त युवती के नवजात शिशु को लेकर बिलासपुर के सेवाभारती मातृछाया शिशु कल्याण केन्द्र पहुंची संयुक्त टीम ने जब बच्चे को संस्थान की अधिक्षिका निशा कांस्यकार को सौंपा तो उन्होंने औपचारिकताएं पूर्ण करने से पूर्व बच्चे का नामकरण किया और उसे यहां रविकांत नाम दिया गया।


मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जारी किया आदेश
कामांधों की वासना का शिकार बनकर अज्ञानता में अपनी चौथी संतान को जन्म देने वाली अविवाहित विक्षिप्त मां के समुचित इलाज और उत्पन्न चौथी संतान को संरक्षित करने हेतु सूरजपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट अनिल कुमार बारा द्वारा जारी आदेश के तहत सूरजपुर पुलिस की ओर से सौंकी चौहान, संतोषी वर्मा एवं संचिता ने जिला चिकित्सालय की ओर से सविना मंसूरी व महिला बाल विकास विभाग की ओर से पवन धीवर एवं अनिता पैकरा की संयुक्त टीम ने विक्षिप्त युवती को राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय सेंदरी में भर्ती कराया। वहीं मासूम बच्चे को बिलासपुर स्थित सेवाभारती मातृछाया शिशु कल्याण केन्द्र में देख-रेख के लिए रखा गया है।


दैहिक शोषण करने वालों पर नहीं हुई कार्रवाई की पहल
महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिनव्याही विक्षिप्त मां और उसके नवजात शिशु के इलाज व सुरक्षा की व्यवस्था तो कर दी। लेकिन युवती की विक्षिप्तता का फायदा उठाकर उसका दैहिक शोषण करने वाले दरिंदों के विरूद्ध अभी तक कार्रवाई की कोई पहल नहीं हो पाई है। सारा मामला संज्ञान में आने के बाद भी पुलिस की उदासीनता को लेकर सवाल खड़े किये जाने लगे हैं।

समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं ने पत्रिका की इस खबर की सराहना करते हुए अपने विचार व्यक्त किये और पीडि़त युवती के साथ अत्याचार करने वाले दरिंदों को सामने लाकर उनके विरूद्ध कड़ी कार्रवाई कर युवती को न्याय दिलाने की बात कही।


मातृछाया में मिली पहली संतान की जानकारी
जब नवजात शिशु को लेकर मातृछाया पहुंची टीम ने अधिक्षिका निशा कांस्यकार से मुलाकात की तो उन्हें यहां वर्ष 2011 में जमा किये गये इसी युवती की पहली संतान की जानकारी लगी। वहां गई संयुक्त टीम के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2011 में इसी युवती की पहली संतान को रखा गया था, बाद में उसे गोद प्रावधानों का पालन करते हुए इच्छुक दम्पति को गोद दे दिया गया था।