
Hooking Electricity
मानी चौक. कोयला खान प्रभावित ग्राम पंचायत गेतरा में आजादी के 70 वर्ष बाद भी बिजली नहीं पहुंची है। इस आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत के 300 से अधिक घरों में पिछले 15-16 वर्षों से चोरी की बिजली का प्रयोग कर ग्रामीणों द्वारा एसईसीएल प्रबंधन को लाखों की क्षति पहुंचाई जा रही है। एसईसीएल प्रबंधन बिजली चोरी रोकने पूरी तरह नाकाम है। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत भवन भी चोरी की बिजली से रोशन हो रहा है।
एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के रेहर भूमिगत परियोजना से करीब 500 मीटर दूरी पर स्थित खान प्रभावित ग्राम पंचायत गेतरा में सरकारी दावों के बीच आज तक सरकारी बिजली नहीं पहुंच सकी है। इस आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत में 300 से अधिक घरों की बस्ती है। इस ग्राम पंचायत क्षेत्र में 10 से अधिक ट्यूबवेल हैं।
दर्जनों ग्रामीणों के घर कूलर भी है लेकिन गांव में सरकारी बिजली नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों द्वारा पिछले 15 वर्षों से एसईसीएल की रेहर कॉलोनी की आपूर्ति की गई एसईसीएल की विद्युत लाइन से अवैध हुकिंग के जरिए चोरी की बिजली का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है।
एसईसीएल प्रबंधन की उदासीन कार्यशैली के कारण ग्रामीणों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर जान जोखिम में डालते हुए करीब 500 मीटर की दूरी तक बांस गाड़कर अवैध हुकिंग के जरिए खींची गई चोरी की बिजली का उपयोग कर एसईसीएल प्रबंधन को प्रतिवर्ष लाखों रुपए की क्षति पहुंचाई जा रही है।
ग्राम पंचायत भवन व स्कूल में भी चोरी की बिजली का उपयोग किया जा रहा है। ग्राम पंचायत गेतरा व कदमपारा में एसईसीएल की रेहर ऑफिसर्स कॉलोनी से तथा पंडोपारा सहित पर्वतियाडांड़, देवभटीपारा, केड़ीपारा में श्रमिक कॉलोनियों में आपूर्ति की गई एसईसीएल की विद्युत लाइन हुकिंग के जरिए अवैध बिजली खींचकर ग्रामीणों द्वारा अपने घरों को रोशन किया जा रहा है।
वहीं एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बिजली चोरी रोकने कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। जबकि कंपनी को प्रतिवर्ष लाखों का चूना लग रहा है।
चोरी के एवज में उगाही
बताया जा रहा है कि बिजली चोरी के एवज में प्रबंधन के कुछ कर्मचारी ग्रामीणों से उगाही भी करते हैं। इस संबंध में ग्राम पंचायत गेतरा के सरपंच गिरधारी राम सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में अभी तक सरकारी बिजली नहीं पहुंची है। विगत 5 माह से विद्युत विभाग द्वारा खंभों को गाडऩे का कार्य किया जा रहा है लेकिन आज तक विद्युत कनेक्शन नहीं दिया जा सका है।
यह भी सच है कि ग्रामीणों द्वारा एसईसीएल की विद्युत लाइन से हुकिंग के जरिए लाइन खींचकर बिजली का उपयोग किया जा रहा है।
Published on:
03 Dec 2017 06:56 pm
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