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यूपी-बिहार और हरियाणा में रहने वालों का छत्तीसगढ़ में बन रहा रियायती राशन कार्ड

चंद रुपयों की खातिर विभाग के कर्मचारी ही कर रहे ऐसा कम, देश में प्रशंसा बटोरने वाली पीडीएस का सूरजपुर में है बुरा हाल

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Ration

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सूरजपुर. वैसे तो छत्तीसगढ़ की पीडीएस की सराहना पूरे देश में हो रही है, लेकिन सूरजपुर जिले में मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना महकमे के कुछ कर्मचारियों की वजह से ही बदनाम होती नजर आ रही है। खाद्य विभाग में बैठे कुछ कर्मचारी दिगर राज्यों में रहने वाले लोगों के नाम से राशन कार्ड जारी कर शासन को तो प्रतिमाह लाखों का चूना लगा ही रहे है, इनकी वजह से कई पात्र हितग्राहियों को इस योजना से वंचित होना पड़ रहा है।

आलम यह है कि हजार-पांच सौ के चक्कर में विभाग के बाबू हरियाणा, यूपी और बिहार में रहने वाले लोगों के नाम से भी राशन कार्ड जारी कर दे रहे है।


गौरतलब है कि पूरे देश में प्रदेश की खाद्य सुरक्षा योजना का डंका बज रहा है। मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत गरीब परिवार को एक रुपए किलो चावल एवं 15 रुपए किलो शक्कर प्रदान करने राशन कार्ड जारी किये जा रहे हैं। प्रति सदस्य 7 किलो चावल की दर से कार्ड में अंकित सदस्य संख्या में गुणात्मक मात्रा में खाद्यान्न देने का प्रावधान है।

सूरजपुर जिले में भी इस योजना का क्रियान्वयन दो वर्ष पूर्व नियमों के अनुरूप ही होता था, लेकिन विगत दो वर्षं में फर्जी तौर पर अपात्र लोगों के लिए नये राशन कार्ड बड़ी संख्या में जारी कर दिये गये।

नए राशन कार्ड के लिए वैसे तो वांछित दस्तावेज, पटवारी प्रतिवेदन, आधार कार्ड, पंचायत प्रस्ताव व अन्य दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं लेकिन जिले के खाद्य विभाग में सक्रिय गिरोह हजार-दो हजार रुपए लेकर बगैर किसी दस्तावेज जमा कराये नये राशन कार्ड जारी कर दे रहे हंै। ऐसे में योजना का दुरूपयोग होना स्वाभाविक है।


शासन को लगा रहे चपत
पीछे के रास्ते से आसानी से राशन कार्ड बन जाने का फायदा स्थानीय लोग जमकर उठा रहे हैं। प्रदेश के बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों के आधार कार्ड मंगवाकर बड़ी संख्या में राशन कार्ड बनवा लिए हैं। लोग ऐसा करके शासन को तो चपत लगा ही रहे है, वहीं खाद्य विभाग में जारी गोरखधंधा को बढ़ावा भी मिल रहा है।

नगर के वार्ड क्रमांक 2, 4, 9 एवं 10 में ऐसे कई कार्ड हैं, जो अवैध तरीके से बने हैं। यहां के कुछ लोगों ने अन्य राज्यों में रहने वाले रिश्तेदारों के आधार कार्ड मंगाकर उनके नाम से राशन कार्ड बनवा लिया है और प्रति माह राशन उठाकर बाजार भाव से बेच दिया जाता है।


कई जरूरतमंद परिवारों के हक पर डाका
शासन स्तर पर कई बार कार्डों की संख्या कम करने की दृष्टि से राशन कार्ड निरस्त कर दिये जाते हैं। उनमें ऐसे जरूरतमंद परिवार भी शामिल हैं जो खाद्यान्न योजना पर ही आश्रित रहते हैं। विभागीय स्तर पर यह प्रक्रिया बीच- बीच में चलती रहती है, लेकिन चंद रुपयों के खातिर प्रदेश से बाहर रहने वाले पात्रहीन व्यक्तियों के नाम से राशन कार्ड जारी करने वाले कर्मचारियों की वजह से गरीबों और जरूरतमंदों का हक छिन जाता है।


एक ही परिवार में कई सदस्यों के बन रहे राशन कार्ड
खाद्य विभाग में सक्रिय गिरोह द्वारा चन्द रुपयों के लालच में शासकीय नियमों व मापदण्डों को दरकिनार कर एक ही परिवार में रहने वाले सदस्यों के नाम से राशन कार्ड जारी कर दिये जा रहे हैं। इतना ही नहीं विशेष प्राथमिकता वाले 35 किलो खाद्यान्न वाले गुलाबी राशन कार्ड भी मोटी रकम लेकर धड़ल्ले से जारी कर दिये गये हंै। इस बात की जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी है, लेकिन वे भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।


जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई
राशन कार्ड जारी करने में लापरवाही और मनमानी की शिकायत निरंतर मिलने पर फिलहाल अभी नये राशन कार्ड बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। पंचायत और नगरीय निकायों के जिम्मेदार अधिकारी की मांग पर ही नये राशन कार्ड जारी करने हेतु निदेर्शित किया गया है। दिगर राज्यों के लोगों के नाम पर राशन कार्ड बनाये जाने की शिकायत नहीं मिली है, यदि ऐसा है तो जांच उपरांत कार्रवाई की जायेगी।
विजय शंकर टेमरे, प्रभारी खाद्य अधिकारी, सूरजपुर