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FEES ISSUE : प्रोविजनल फीस तो होती है जारी सवाल यह कि मानते है कितने स्कूल..?

- फीस का 25वां राउंड जारी... - स्कूलों की फीस 4 हजार से 87 हजार तक घटाई

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FEES ISSUE : प्रोविजनल फीस तो होती है जारी सवाल यह कि मानते है कितने  स्कूल..?

FEES ISSUE : प्रोविजनल फीस तो होती है जारी सवाल यह कि मानते है कितने स्कूल..?

सूरत.
सूरत जोन की फीस नियामक समिति (एफआरसी) ने मंगलवार को शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए प्रोविजनल फीस का 25वां राउंड जारी किया। नए सत्र की प्रोविजनल फीस जारी नहीं होने से स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे थे। एफआरसी ने 25वें राउंड में स्कूलों की फीस 4 हजार से 87 हजार रुपए तक घटाई है। अब देखना यह है कि कितने स्कूल एफआरसी के इस आदेश का पालन करते हैं।

मंगलवार को जिन स्कूलों की प्रोविजनल फीस जारी की गई, उनमें सूरत के16, नवसारी के 3, वलसाड के 11 स्कूल, भरुच और तापी के एक-एक स्कूल का नाम के सूची में शामिल हैं। 25वें राउंड में 32 स्कूलों की प्रोविजनल फीस तय की गई है। 25वें राउंड की सूची में शहर के कई बड़े स्कूलों के नाम शामिल है।

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वसूल रहे थे मनमानी फीस :
शहर के कई बड़े स्कूलों की फीस एक से 2.5 लाख रुपए हैं। इनकी फीस में एफआरसी ने चार हजार से 87 हजार रुपए तक की क्टौती है। यह फीस शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए जारी की गई है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 की फीस जारी नहीं होने पर स्कूलों ने मनमानी फीस वसूल रखी है।

कितने स्कूल लौटाएंगे अतिरिक्त फीस!
देखना यह है कि प्रोविजनल फीस जारी होने के बाद कितने स्कूल आदेश का पालन करते हैं। कितने स्कूल अभिभावकों को अतिरिक्त फीस वापस लौटाते हैं। इससे पहले 24वें राउंड में 11 स्कूलों की प्रोविजनल फीस तय की गई थी। 23वें राउंड में 17 स्कूलों की प्रोविजलन फीस तय की गई थी। इनमें सूरत के 12 और वलसाड के 5 स्कूलों के नाम शामिल थे। 23वें राउंड में स्कूलों की प्रोविजनल फीस में 1500 से 32 हजार तक की कमी की गई थी।

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अब तक एफआरसी ने दक्षिण गुजरात के कई साले स्कूलों की प्रोविजनल फीस तय कर जारी की है। कितनों ने आदेश का पालन किया है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। जो आदेश का पालन नहीं करते उनके खिलाफ अभिभावकों ने शिकायत भी की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई के नाम पर स्कूलों पर जुर्माना लगाना शुरू किया गया है। लेकिन जिन स्कूलों पर जुर्माना लगाया है उन्होंने अभी तक जुर्माना भरा भी नहीं है। अभिभावक अतिरिक्त फीस वापस लेने के लिए स्कूलों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन अभिभावकों को स्कूल से तो कोई न्याय नहीं मिलता है, लेकिन जहां से न्याय मिलना चाहिए वहां भी बच्चे एवं अभिभावकों को चक्कर काटने पड़ते हैं।