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आयकर विभाग ने पचास साल पुराने मामलों में भी रिकवरी शुरू की

अधिकारी पुराने मामलों में नोटिस देने में और गुमशुदा करदाताओं को ढूंढने में व्यस्त
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आयकर विभाग ने पचास साल पुराने मामलों में भी रिकवरी शुरू की

सूरत
सूरत आयकर कमिश्नरेट वर्तमान वित्तीय वर्ष में नए सर्वे, सर्च करने की अपेक्षा पुराने मामलों में रिकवरी करने पर जोर दे रहा है। आयकर विभाग में इन दिनों अधिकारी पुराने मामलों में नोटिस देने में और गुमशुदा करदाताओं को ढूंढने में व्यस्त हैं। कई मामलों में तो पचास साल से पहले के केस में भी अधिकारी टैक्स कलेक्शन के लिए नोटिस भेज रहे हैं।
बताया जा रहा है कि आयकर विभाग के नए नियमों के अनुसार यदि सर्वे और सर्च के बाद करदाता के यहां से जितना कालाधन मिला उसका 82 प्रतिशत टैक्स और कुल मिलाकर 127 प्रतिशत रकम चुकानी होगी।
कड़े नियमों के कारण आयकर विभाग कार्रवाई को टाल रहा है और पुराने मामलों में ही रिकवरी पर जोर दे रहा है। पुराने कई मामलों में विभाग ने गुमशुदा करदाताओं को ढूंढने के लिए अलग-अलग एजंसियों की मदद ले रहे हैं। कई मामलों में विभाग ने करदाताओं के बैंक अकाउंट और संपत्ति आदि जब्त करने की भी कार्रवाई की है। अब विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर रिकवरी अधिकारियों ने पचास साल पुराने मामलों में भी नोटिसे भेजना शुरू की है। हालाकि अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कुछ करदाता तो अब जीवित नहीं हैं और कुछ बताए गए स्थान पर नहीं है, लेकिन अब विभाग यहां से टैक्स रिकवरी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। ऐसी भी चर्चा है कि वर्ष 2014 के पहले किन्हीं कारणों से इन मामलों में टैक्स रिकवरी के लिए गंभीरता नहीं दिखाई गई, लेकिन सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स के निर्देश के बाद विभाग ने 40-50 साल पहले के मामलों में भी कार्रवाई शुरू की है। उल्लेखनीय है कि आयकर विभाग में इन दिनों स्क्रूटनी के मामले और रि-ओपन मामलों के लेकर अधिकारी व्यस्त हैं। एक ओर स्क्रूटनी के मामलों में नोटिस ऑनलाइन भेजी जा रही है इसका जवाब भी ऑनलाइन ही आ रहा है लेकिन आयकर विभाग का सिस्टम धीमा होने के कारण करदाता उस पर पूरे दस्तावेज अपलोड नहीं कर पा रहे और कई मामलों में तो करदाताओं का जवाब अधिकारी को दिखता ही नहीं अधिकारी इसी में परेशान हैं।