
NATIONAL SPORTS DAY : स्र्पोट्स कल्चर और प्रोफेशनल फैसिलिटीज बेहद जरुरी
दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत. सवा अरब से अधिक आबादी वाले हमारे देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं हैं। यदि स्र्पोट्स कल्चर और प्रोफेशनल फैसिलिटीज की कमी को पूरा किया जाए तो भारत भी ओलम्पिक जैैसे बड़े आयोजनों में अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और चीन की तरह खुद को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर सकता हैं।
यह बात हाल ही में कॉमनवेल्थ खेलों में भारत को स्वर्ण दिलाने वाले सूरत के टेबल-टेनिस स्टार हरमित देसाई ने पत्रिका से खास बीच में कही। उन्होंने बताया कि विभिन्न खेलों में, जो प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती हैं। उनमें से अधिकतर को निजी जीवन में हर तरह से काफी संघर्ष करना पड़ता हैं।
यदि अपनी बात करू तो स्र्पोट्स कल्चर यानी खेलों को बढ़ावा देने की प्रवृर्ति के अभाव में मुझे भी इससे दो चार होना पड़ा। मुझे अपने खेल के लिए कुछ स्कूलों से सहयोग नहीं मिला। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सूरत में ही आधा दर्जन से अधिक स्कूलें बदलनी पड़ी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की पेशेवर कोचिंग के लिए विदेश जाना पड़ता हैं।
ऐसा नहीं होना चाहिए, खिलाडिय़ों को अपने खेल में आगे बढऩे के लिए हर तरह से प्रोत्साहन मिलना चाहिए। देश में स्र्पोट्स कल्चर को और अधिक प्रमोट करना जरुरी हैं ताकि युवा अधिक से अधिक संख्या में खेलों से जुड़े। उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं की समय पर पहचान हो सके। यह जिम्मेदारी सिर्फ स्कूलों या सरकार तक ही सिमित नहीं होनी चाहिए बल्कि हर किसी को इससे जुडऩा चाहिए।
इसके अलावा सभी खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रोफेशनल फैसिलिटीज को डवलप करना बेहद जरुरी हैं, ताकि इन प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिसाब से ढाला जा सके। इस तरह की फैसिलिटीज सभी राज्यों में होनी चाहिए। हालांकि पिछले कुछ वर्षो से इस दिशा में गुजरात समेत पूरे देश में प्रयास हो रहे है। खेल महाकुंभ समेत अन्य आयोजनों के जरिए स्र्पोट्स कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अहमदाबाद व सूरत समेत बड़े शहरों में अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं से युक्त स्र्पोट्स कॉम्प्लेक्स भी बन रहे हैं, लेकिन अभी और अधिक डवलपमेंट की जरुरत हैं। यदि में अपने खेल टेबल टेनिस की बात करूं तो सिर्फ बैंग्लुरू को छोड़ दे तो अन्य शहरों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। वहीं चीन के करीब आधा दर्जन शहरों में ऐसे कॉम्पलेक्स हैं जहां एक साथ टीटी 100 से अधिक टेबल लगाई जा सकती हैं।
यहां उल्लेखनीय है कि सूरत में 1993 में जन्में हरमीत देसाई ने अपने पिता से प्रेरणा हासिल कर सिर्फ 9 वर्ष की उम्र में टेबल टेनिस खेलना शुरू किया था। 2019 में अर्जुन पुरस्कार जीतने वाले हरमीत 2018 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण व कांस्य, एशीयन गेम्स में कांस्य जीत चुके हैं। 2021 की एशीयन चैम्पियनशिप में भी दो कांस्य जीते हैं। वहीं हाल ही में हुए इंग्लैण्ड में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में भी भारत को स्वर्ण दिलाया है।
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14 स्वर्ण समेत सूरतीयों ने तैराकी में जीते 36 पदक
सूरत. पिछले दिनों अहमदाबाद में आयोजित राज्य स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता में सूरती खिलाडिय़ों ने 14 स्वर्ण समेत 36 पदक जीते। सूरत डिस्ट्रिक्ट एक्वेटिक एसोसिएशन के प्रमुख गणेश सेलर ने बताया कि अहमदाबाद के स्वराज स्पोट्र्स कॉम्प्लेक्स में हुई राज्य स्तरीय सीनियर प्रतियोगिता में 14 स्वर्ण, 15 रजत व 7 कांस्य पदक जीते। व्यक्तिगत स्पर्धा में कल्याणी सक्सेना गुजरात चैम्पियन रही।
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Published on:
28 Aug 2022 09:28 pm
