
वाइटल हेल्थकेयर प्रालि कंपनी
राजेश यादव@ वापी. अब तक अपने औद्योगिक प्रदूषण के लिए बदनाम वापी इस बार अच्छे कार्य की वजह से चर्चा में है। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमितों को बचाने के लिए सबसे प्रभावशाली मानी जा रही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सल्फेट (एचसीक्यूएस) का उत्पादन वापी में हो रहा है। पूरे गुजरात में यह उत्पाद सिर्फ तीन कंपनियां तैयार करती हैं। इनमें से दो वापी जीआइडीसी में स्थित हैं। इनमें से एक वाइटल हेल्थकेयर प्रालि कंपनी ने कोरोना के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए सरकार से उत्पादन बढ़ाने की मंजूरी भी मांगी है।
आम तौर पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सल्फेट का उपयोग मलेरिया, डायबिटीज जैसे रोग व इम्यूनिटी पावर बढ़ाने में किया जाता है। इन दिनों कोरोना वायरस के खिलाफ पूरे विश्व में वैक्सीन पर शोध चल रहा है। इस बीच एचसीक्यूएस दवाई अन्य दवाओं से ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है। गत दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री मोदी से इस दवा उपलब्ध कराने का अनुरोध कियाथा। जबकि ब्राजील की सरकार ने तो इसे संजीवनी बूटी बता दिया। ऐसे में इसका उत्पादन करने वाली वापी की वाइटल केयर हेल्थकेयर अचानक सुर्खियों में आ गई है।
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प्रतिमाह चार टन तक उत्पादन
कंपनी के अधिकारी शंकर बजाज ने बताया कि वर्तमान में कंपनी में चार टन तक उत्पादन की मंजूरी है। यह मल्टीस्टेज प्रोडक्ट है और इसके तैयार होने में तीन दिन तक का समय लगता है। जिस तरह से इस प्रोडक्ट की मांग महसूस की जा रही है उसे देखते हुए यदि सरकार की ओर से मंजूरी मिली तो कंपनी दस टन तक उत्पादन क्षमता बढ़ा सकती है। उन्होंने बताया कि कोरोना के इलाज में इस दवा के ज्यादा प्रभावी होने का पता चलने पर इसका टैबलेट बनाने वाली कंपनियों द्वारा खूब मांग की जा रही है।
एक ग्राम में ढाई टेबलेट
कंपनी द्वारा तैयार एचसीक्यूएस के एक ग्राम से चार सौ मिली ग्राम की ढाई टैबलेट तैयार हो सकती है। बजाज के अनुसार कंपनी द्वारा इसे तैयार करने के लिए रॉ-मटेरियल की कोई कमी नहीं है और करीब तीन से चार माह तक चलने लायक रॉ मटेरियल का स्टॉक है। शंकर बजाज ने बताया कि एक तरह से कंपनी लाइफ सेविंग प्रोडक्ट है।
श्रमशक्ति की कमी बन रही बाधा
लॉकडाउन में अन्य कंपनियां बंद हैं और उनके कर्मचारी घर बैठे हैं। वहीं, सरकारी मंजूरी से चल रही वाइटल हेल्थकेयर करीब 20 प्रतिशत मैनपावर की कमी सेजूझ रही है। इस बारे में शंकर बजाज ने बताया कि कोरोना के कारण लॉकडाउन के चलते विभिन्न ग्रामीण विस्तारों में आने जाने पर प्रतिबंध लगा है। ऐसे में कंपनी में आने के इच्छुक कामदारों को भी सरपंच या अन्य लोग आने नहीं देना चाहते हैं। इससे कंपनी में काम प्रभावित हो रहा है।
Published on:
08 Apr 2020 09:38 pm
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