जानकारी इस बात की भी नहीं है कि उत्तराखंड से निकलने वाले औद्योगिक अवशिष्ट यूपी में प्रवेश करने के बाद नदी के जरिए किन बिंदुओं पर जाकर मिलती है। यही नहीं, यूपी से निकलने वाली गंदगी उत्तराखंड से निकलने वाले औद्योगिक अवशिष्ट से मिलकर किन राज्यों में जाती है, इसका भी कोई सहीं आकलन नहीं किया गया हैं। इस दौरान एमसी मेहता ने कहा कि उत्रर प्रदेश और उत्रराखंड की सरकारों को अपने-अपने राज्यों में प्रदूषण पर नियंत्रण रखना चाहिए। औद्योगिक अवशिष्ट और सीवेज से निकलने वाली गंदगी को वे संभाले, साथ ही इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय, जल संस्थान मंत्रालय, एनजीआरबीए, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्यों के प्रदूषण बोर्ड व अन्य प्राधीकरण मिलकर इसकी जांच करें। उन्होंने आगे कहा कि उत्रर प्रदेश और उत्रराखंड अब शहरीकरण की राह पर चल पड़े हैं, लेकिन इसकी कीमत गंगा को चुकानी पड़ रही है क्योंकि उद्योंगो से निकलने वाला कचरा गंगा में बहाया जा रहा है।