
पिनराई विजयन ने 15 अगस्त को पूरे गीत के गायन का किया विरोध, फोटो सोर्स- IANS
Kerala Vande Mataram Controversy: केरल में 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) समारोह के दौरान राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के पूरे संस्करण के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। केरल के विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने राज्य सरकार द्वारा जारी इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूडीएफ सरकार का यह कदम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण को दर्शाता है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए पिनराई विजयन ने कहा कि वंदे मातरम की केवल शुरुआती पंक्तियों (स्टेंजा) का ही गायन किया जाना चाहिए, क्योंकि पूरा गीत देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि संविधान सभा ने यह तय किया था कि वंदे मातरम की केवल शुरुआती पंक्तियां ही गाई जाएंगी। पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई शीर्ष नेताओं और कांग्रेस पार्टी की भी यही नीति रही थी।
विजयन ने कहा कि राज्य में यूडीएफ (UDF) सरकार आने के बाद से इस नीति में बदलाव देखा जा रहा है। मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी पूरा वंदे मातरम गाया गया था और अब स्वतंत्रता दिवस पर भी इसे लागू किया जा रहा है। विजयन ने कहा कि पूरा वंदे मातरम गाना आरएसएस की नीति है, जिसे हमारे देश ने स्वीकार नहीं किया था। सरकार को इस फैसले को तुरंत सुधारना चाहिए।
दरअसल, 6 अगस्त को केरल के मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के 'हर घर तिरंगा' अभियान से जुड़े एक पत्र के बाद यह दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए पूरे गीत के गायन की बात कही गई है।
इस आदेश पर माकपा (CPI-M) नेता पी. राजीव ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार को केंद्र के निर्देशों पर ही चलना है, तो फिर मुख्यमंत्री और मंत्रियों की क्या जरूरत है? पी. राजीव ने कांग्रेस आलाकमान से सवाल किया कि क्या पूरे वंदे मातरम को न गाने की उनकी राष्ट्रीय नीति बदल गई है, और इस मुद्दे पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
Updated on:
08 Aug 2026 04:20 pm
Published on:
08 Aug 2026 04:20 pm
