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मंदिर की जमीन पर काटी कॉलोनी पर ‘बुलडोज़र एक्शन’, कोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई

Bulldozer action: फर्जी तरीके से बेची गई मंदिर की जमीन पर बनाई कॉलोनी पर प्रशासन ने बुलडोजर चलवाया। कोर्ट के आदेश पर अवैध कब्जा हटाकर जमीन मंदिर के नाम पुनः दर्ज कर दी गई।

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Bulldozer action on colony built on the land of Bihari Ju temple in tikagarh by officials

टीकमगढ़ के बिहारी जू मंदिर की जमीन पर काटी कॉलोनी पर बुलडोज़र एक्शन (फोटो सोर्स- टीकमगढ़ PRO एक्स हैंडल)

Bulldozer action: टीकमगढ़ के बिहारी जू मंदिर की जमीन का फर्जी तरीके से विक्रय कर नामांतरण किया गया था। उसकी रजिस्ट्री और नामांतरण को कलेक्टर कोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया था। मंदिर की जमीन पर बनाई गई कॉलोनी को तहसीलदार अरविंद्र यादव ने बोर्ड लगाकर मंदिर के पक्ष में कब्जा दिलाया था। मंगलवार को तहसीलदार और एसडीएम ने ढोंगा रोड मंगल भवन के सामने मंदिर की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।

एसडीएम और तहसीलदार की देख-रेख में कार्रवाई

मंगलवार को एसडीएम लोकेंद्र सिंह सरल और तहसीलदार अरविंद्र यादव के साथ पुलिस ने ढोंगा रोड मंगल भवन के सामने मंदिर की जमीन पर निर्माण की गई कॉलोनी पर बुलडोजर चलवाया। मप्र नगर पालिका अधिनियम 1961और कॉलोनी विकास निगम 2021 के तहत अवैध निर्माण करने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। बताया गया कि यह कार्रवाई स्वदेश रावत द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद हुई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर कलेक्टर ने मामले की जांच की।

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इनका कहना है

कलेक्टर ने बिहारी जू मंदिर से संबंधित भूमि खसरा नंबर खसरा नंबर 768 और 769 को सरकारी घोषित किया है। इस जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी जा रही थी। कर्मचारियों के साथ बुलडोजर से इस जमीन पर किए गए निर्माण कार्य को हटाया गया है। लोकेंद्र सिंह सरल, एसडीएम टीकमगढ़।

नगर के हवेली रोड स्थित बिहारी जू मंदिर की सेवा पूजा एवं प्रबंध के लिए राज्य ओरछा के समय अधिकार अभिलेख 2001, वर्ष. 1944 में 768 रकबा 2.01 एकड़ एवं खसरा 769 रकबा 0.31 एकड़ भूमि तत्कालीन ओरछा राज्य द्वारा मंदिर के प्रबंधन के लिए अन्य भूमियों के साथ राजस्व अधिकार अभिलेख में दर्ज हुई थी। मंदिर के पुजारी विन्द्रावन, परमेश्वरी, दयाल व हरिवल्लभ अध्वर्यु पुत्र नवल किशोर ब्राह्मण व्यवस्था के लिए नियुक्त थे। उक्त लोगों के साथ बिहारी जू मंदिर के नाम जमीन संबंधी दस्तावेजों में दर्ज था, लेकिन संवत 2015, वर्ष. 1958 में बिहारी जू मंदिर का नाम विलोपित कर दिया गया।

2023 से नहीं हुई खरीद-बिक्री

वर्ष 2023 की शुरुआत तक जमीन की खरीद बिक्री नहीं हुई, लेकिन बाद में अनुबंध पत्र बनाकर जमीन को राजाराम राय के नाम विक्रय कर दिया गया। नगर के स्वदेश रावत द्वारा हाईकोर्ट में प्रकरण दर्ज कराया। न्यायालय के आदेश पर कलेक्टर ने मंदिर की जमीन की जांच करवाई और फिर कलेक्टर न्यायालय की ओर से आदेश जारी किया गया।