
Drishyam 3 First Review in Hindi (सोर्स- एक्स)
Drishyam 3 First Review in Hindi: सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों की दुनिया में ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का नाम अब किसी पहचान का मोहताज नहीं रह गया है। साल 2013 में शुरू हुई ये कहानी अब अपने तीसरे पड़ाव तक पहुंच चुकी है। मोहनलाल स्टारर ‘दृश्यम 3’ इस बार सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं, बल्कि डर, अपराधबोध और परिवार को बचाने की जंग की कहानी बनकर सामने आई है। निर्देशक जीतू जोसेफ ने इस बार कहानी को ज्यादा भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक अंदाज में पेश किया है।
‘दृश्यम 3’ वहीं से शुरू होती है जहां दूसरा भाग खत्म हुआ था। जॉर्ज कुट्टी अब पहले जैसा शांत और आत्मविश्वासी इंसान नहीं रहा। वो अपने परिवार को बचाने के लिए जो कुछ कर चुका है, उसका डर हर पल उसके साथ चलता है। पुलिस की नजरें अब भी उस पर टिकी हुई हैं और अतीत की परछाइयां उसका पीछा नहीं छोड़ रहीं।
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे जॉर्ज कुट्टी अपने परिवार को सामान्य जिंदगी देने की कोशिश करता है, लेकिन हर छोटी घटना उसे पुराने हादसे की याद दिला देती है। इस बार कहानी में सिर्फ जांच और चालाकी नहीं, बल्कि एक पिता की बेचैनी और मानसिक तनाव को भी गहराई से दिखाया गया है। फिल्म धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते दर्शकों को कई चौंकाने वाले मोड़ देती है।
अगर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो वो Mohanlal का अभिनय है। उन्होंने जॉर्ज कुट्टी के डर, तनाव और मजबूरी को इतनी बारीकी से निभाया है कि कई सीन सीधे दिल पर असर छोड़ते हैं। खासकर आंखों के हावभाव और शांत चेहरे के पीछे छिपी घबराहट को उन्होंने कमाल तरीके से दिखाया है।
मीना ने पत्नी के किरदार में शानदार काम किया है। वहीं अंसिबा हसन और एस्थर अनिल ने भी अपने किरदारों को मजबूती से निभाया है। फिल्म में परिवार के हर सदस्य की मानसिक हालत को अच्छे तरीके से दिखाया गया है।
जीतू जोसेफ एक बार फिर साबित करते हैं कि सस्पेंस को बिना ज्यादा शोर-शराबे के भी मजबूत बनाया जा सकता है। फिल्म का स्क्रीनप्ले धीरे-धीरे खुलता है, लेकिन यही इसकी खासियत भी है। कई जगह कहानी थोड़ी स्लो महसूस होती है, लेकिन क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते सारी कड़ियां जुड़ जाती हैं।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक भी माहौल को मजबूत बनाते हैं। हर सीन में एक अनजाना डर महसूस होता है, जो दर्शकों को कहानी से जोड़े रखता है।
अगर आप तेज रफ्तार मसाला थ्रिलर की उम्मीद लेकर जाएंगे तो शायद फिल्म थोड़ी अलग लगे। लेकिन अगर आपको मनोवैज्ञानिक सस्पेंस और मजबूत कहानी पसंद है, तो ‘दृश्यम 3’ आपको निराश नहीं करेगी। ये फिल्म सिर्फ अपराध छिपाने की कहानी नहीं, बल्कि उस अपराध के बाद जिंदगीभर डर के साथ जीने की कहानी है।
‘दृश्यम 3’ एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है और ये साबित करती है कि जॉर्ज कुट्टी का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
Published on:
21 May 2026 10:26 am
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