16 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धनतेरस से पहले ‘धनतेरस’ ,बाजार से भगौने व गिलास गायब, सप्ताहभर में ही 6 लाख से अधिक का कारोबार

जिले में 1588 विद्यालयों व मदरसों के शिक्षकों ने ढाई-ढाई हजार के बर्तन खरीदे हैं। ऐसे में तीन लाख 97 हजार रुपए के बर्तन खरीदे गए।

2 min read
Google source verification
Annapurna Milk Scheme

टोंक में बर्तनों की खरीद करते शिक्षक।

राकेश पालीवाल

टोंक. विद्यार्थियों को सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाने की घोषणा ने बर्तनों के दुकानदारों की बल्ले-बल्ले कर दी है। आलम यह है कि सप्ताहभर में जिले में पांच लाख से अधिक के बर्तनों का कारोबार हो चुका है। योजना को लेकर खरीदे गए बर्तनों के बाद दुकानों से भगौने व गिलास आदि गायब हो चुके हैं।

ऐसे में बर्तनों की खरीद के लिए शहर आए शिक्षकों को इच्छित बर्तनों का ऑर्डर देकर ही रविवार को गांव लौटना पड़ा। उल्लेखनीय है कि जिले में संचालित सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को अन्नपूर्णा दुग्ध योजना के तहत सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाने की घोषणा सरकार की ओर से की गई है।

इसके तहत दो जुलाई से इसकी क्रियान्वित की जानी है। योजना के तहत जिले के 1588 राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों व मदरसों के एक लाख 16 हजार 156 विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।

इनमें पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को डेढ़ सौ व छठी से आठवीं तक के बालकों को दो सौ ग्राम दूध पीने को मिलेगा। ऐसे में विभाग की ओर से विद्यालयों को बर्तनों की खरीद को लेकर ढाई-ढाई हजार का बजट आवंटित किया गया है। इनमें प्रति विद्यार्थी गिलास के लिए 20-20 रुपए का बजट अतिरिक्त जारी किया गया है।


यूं समझे खरीद का गणित
विद्यालयों को बजट मिलने के बाद शिक्षकों ने बर्तनों की खरीद पूरी कर ली। इनमें स्टील का भगौना, टोंटीयुक्त स्टील की टंकी, विद्यार्थियों के अनुपात में स्टील गिलास, दूध लाने के लिए कंटेनर समेत दो जग, पलटा व अन्य बर्तन शामिल हैं।

जिले में 1588 विद्यालयों व मदरसों के शिक्षकों ने ढाई-ढाई हजार के बर्तन खरीदे हैं। ऐसे में तीन लाख 97 हजार रुपए के बर्तन खरीदे गए। इनके अतिरिक्त लाभान्वित होने वाले एक लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए 20-20 रुपए प्रति गिलासोंं की भी खरीद भी ढाई हजार के बजट के अतिरिक्त की गई है, जो अन्य मद में समायोजित किया जाएगा।

ऐसे में अनुमान के मुताबिक 6 लाख से अधिक के बर्तनों की बिक्री हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रतिदिन 7 हजार 940 लीटर दूध पीएंगे। इसमें 2 हजार लीटर शहरी क्षेत्र व 6 हजार लीटर दूध की आवश्यकता ग्रामीण क्षेत्रों में पड़ेगी।

ये रजिस्टर भी खूब बिके
दूध योजना को लेकर स्टेशनरी की दुकानों से दूध वितरण व दूध भण्डार रजिस्टरों की भी खूब बिक्री हुई। स्टेशनरी विक्रेता रजनीश मंगल ने बताया कि ढाई सौ रजिस्टर महज दो दिन में ही बिक गए। इसके बाद फिर से मंगवाए हंै।

बिक्री बढ़ी तो बीत गए
भगौने व गिलासों की बिक्री में तेजी आई तो ये बीत गए। बीच-बीच में कई बार ऑर्डर देकर मंगवाए गए।
सुरेश जाजू, बर्तन दुकानदार

फिलहाल भगौना गिलास नहीं
दुकान में रखे बड़े भगौने व गिलास समाप्त हो चुके हैं। हालांकि गिलास तो मंगवा लिए, लेकिन भगौने के मांग अनुसार आर्डर दिए जा रहे है।
जगदीश कसेरा, बर्तन दुकानदार