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देश की राजधानी तक महक रही बनास की तरकारी, जिले आर्थिक समृद्धि के खुले द्वार

10 हजार परिवार जुड़े हैं व्यवसाय सेजयपुर, कोटा और दिल्ली मंडी में जाती है सब्जियांसर्वाधिक पसंद है टोंक का टिंडालालमिर्च हो गई लुप्तखरबूजा व तरबूज का नाम भी चलन में हो गया कमटोंक. जिले की बनास नदी का पानी जहां तीन जिलों के लोगों के कंठतर कर रहा है। वहीं इस पानी से तैयार हो रही सब्जियां देश की राजधानी तक महक रही है। टोंक जिले की सब्जियां दिल्ली मंडी तक बिक रही है। इसका कारण यहां शुद्ध पानी है।

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टोंक

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Jalaluddin Khan

Nov 09, 2022

देश की राजधानी तक महक रही बनास की तरकारी, जिले आर्थिक समृद्धि के खुले द्वार
10 हजार परिवार जुड़े हैं व्यवसाय से
जयपुर, कोटा और दिल्ली मंडी में जाती है सब्जियां
सर्वाधिक पसंद है टोंक का टिंडा
लालमिर्च हो गई लुप्त
खरबूजा व तरबूज का नाम भी चलन में हो गया कम
टोंक. जिले की बनास नदी का पानी जहां तीन जिलों के लोगों के कंठतर कर रहा है। वहीं इस पानी से तैयार हो रही सब्जियां देश की राजधानी तक महक रही है। टोंक जिले की सब्जियां दिल्ली मंडी तक बिक रही है। इसका कारण यहां शुद्ध पानी है।

इसमें बड़ी बात यह भी है कि बीसलपुर बांध और बनास नदी में पानी के साथ कई तरह की खाद भी बहकर आती है। ऐसे में वह तल में जम जाती है और उससे उत्पादन बेहतर होता है। एक अनुमान के मुताबिक सब्जी की खेती से जिले में करीब 10 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। एक हजार परिवार तो जिला मुख्यालय पर है। यह बनास नदी और उसके किनारें पर बने खेतों में सब्जी का उत्पादन करते हैं।


टोंक की सब्जी को पसंद किए जाने का दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि बिना किसी केमिकल वाले पानी जैसे कुओं व बनास नदी के पानी से होती है। जिले में सब्जी की खेती करीब चार हजार हैक्टेयर में होती है। कृषि उद्यान विभाग के मुताबिक सब्जी की खेती शहर में वजीरपुरा, लहन, महादेववाली, कम्पू, बनास नदी, पक्का बंधा, सरवराबाद, सईदाबाद, श्योपुरी में होती है। जबकि प्रमुख रूप से टिंडा पचेवर, पराना, डिग्गी, खुरथल, चौसला, चिरोंज, बनेठा, ककोड़ में होता ही।

लगातार बढ़ रही है खेती
जिले में सब्जी की खेती लगातार बढ़ रही है। एक दशक पहले तक यह 3 हजार हैक्टेयर में थी, जो अब 4 हजार हैक्टेयर तक पहुंच गई है। इसका कारण सब्जी के दाम अच्छे मिलना है।


करोड़ों का होता है व्यवसाय
शहर में सर्वाधिक खेती खीरा, गाजर व मूली की होती है। किसान दिनेश कुमार, बबूल सैनी, शंकर लाल चौधरी आदि किसानों ने बताया कि एक बीघा खेत में गाजर 40, मूली 40, खीरा 25 तथा टींडा करीब 20 क्विंटल तक हो जाता है। ऐसे में एक बीघा में ही गाजर करीब 80 हजार रुपए की हो जाती है। यह जिले में करीब 500 बीघा में होती है। ऐसे में जिलेभर में करीब 4 करोड़ रुपए की हो जाती है।


तीखेपन के लिए देश भर में थी मशहूर
तीखेपन के लिए देश भर में मशहूर टोंक की मिर्च की पैदावार अब खत्म हा ेगई है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1994 से पहले तक टोंक जिले में करीब 10 हजार से अधिक हैक्टेयर में मिर्च की पैदावार होती थी। उन्हीं दिनों बीसलपुर बांध का निर्माण हुआ था।


इसके बाद से बनास नदी में पानी की आवक कम हो गई। ऐसे में बनास नदी में पैदा होने वाले खरबूजे तथा मिर्च की पैदावार लगातार घटती गई। वर्तमान हालात यह है कि खरबूजे तो महज 50 से 60 हैक्टेयर में ही होते हैं। जबकि मिर्च की पैदावार करीब 200 हैक्टेयर तक ही सिमट गई।


इतने हैक्टेयर में होती है
सब्जी हैक्टेयर
टिंडा 700
खीरा 250
मिर्च 250
टमाटर 300
करेला 150
गोबी 200
फैक्ट फाइल
बनास व अन्य पेटा काश्तत में खेती का रकबा- 1200 हैक्टेयर
सब्जी से जुड़े हैं परिवार- 10 हजार
कारोबार होता है- 20 करोड़ का
सब्जियां के प्रकार है – 20
एक दशक में रकबा बढ़ा – 1000 हैक्टेयर

टोंक जिले की जमीन की खास बात
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले की जमीन काली कपास वाली मिट्टी (ब्लैक कोटन सोइल) है। इसमें केल्सियम की परत पहले से ही मौजूद है। इससे खाद में मिलने वाले फासफोरस की जरूरत कम पड़ती है। इसके अलावा खेतों में जिंक, सल्फर, नाइट्रोजन, मैगनेसियम, फेरस आदि तत्व भी पर्याप्त है। ऐसे में यह सब्जी के लिए अच्छी जमीन है।


लोगों में रुझान बढ़ रहा है
किसानों में सब्जी के प्रति रुझान बढ़ रहा है। अब किसान मौसम के विपरीत भी सब्जी पैदा कर रहे हैं। इससे उन्हें अच्छे दाम मिल जाते हैं। किसानों को चाहिए कि वे सब्जी के लिए अच्छे प्रमाणित बीज का ही उपयोग करे। पहले मिट्टी व पानी की जांच लैब में करा ले। इसके आधार पर ही खाद व उर्वरक डाला जाए।
– राजेन्द्र कुमार सामोता सहायक निदेशक, कृषि उद्यान विभाग टोंक