
बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता आर. सी. कटारा ने बताया कि बांध के जलभराव से मिट्टी व बजरी निकाली जाती है तो जलभराव क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी।
राजमहल. बीसलपुर बांध बनने के बाद हर वर्ष बांध के जलभराव में एकत्र होती बजरी व मिट्टी के साथ ही घटती बांध की जलभराव क्षमता को वापस बढ़ाने की सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। बांध के जलभराव के बीच एकत्र बजरी को बाहर निकालकर निर्यात करने को लेकर मंगलवार को राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स कम्पनी जयपुर की ओर से ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन इण्डिया कम्पनी विशाखापट्टनम के दल ने बांध परियोजना अभियंताओं के साथ बैठक ली।
इस दौरान जयपुर खनिज विभाग के अभियंता भी मौजूद थे। दल के सदस्यों ने बांध से बजरी निकालने का समय, जलभराव की गहराई, बजरी की गुणवत्ता, निकाली जाने वाली बजरी के स्टॉक को एकत्र करने के लिए खाली भूमि आदि पर चर्चा की। बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता आर. सी. कटारा ने बताया कि बांध के जलभराव से मिट्टी व बजरी निकाली जाती है तो जलभराव क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी।
बीसलपुर बांध 1996 में बनकर तैयार हुआ था। बांध की कुल जलभराव क्षमता 315.50 आर एल मीटर है, जिसमें 38.703 टीएमसी पानी का भराव होता है। मंगलवार सुबह बांध का गेज 310.36 आर एम मीटर दर्ज किया गया है। बांध के कुल जलभराव में 212 वर्ग किमी क्षेत्र जलमग्न होता है।
इसमें बनास, खारी व डाई नदियां आती है, जिसमें जलभराव रहने के कारण बजरी का खनन नहीं हुआ है। ऐसे में हर वर्ष बरसात के दौरान पानी के बहाव के साथ बजरी भी एकत्र होती रही है। इसके चलते बांध के जलभराव की क्षमता भी घटी है।
ये रहे मौजूद
बांध स्थल पर हुई बैठक के दौरान अतिरिक्त निदेशन खनन जयपुर एम. पी. मीणा, राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स जयपुर के सीनियर मैनेजर रितेश पोकरणा, ड्रेजिंग कॉर्पोशन इण्डिया विशाखापटनम के जॉईन्ट जनरल मैनेजर टीवी सुरेश कुमार, सहायक मैनेजर वी रेवल, एडीएम पुनर्वास भावना शर्मा, बांध परियोजना के अधिक्षण अभियंता वीएस सागर, सहायक अभियंता मनीष बंसल, तहसीलदार देवली मानसिंह आमेरा मौजूद थे।
मिट्टी के स्टॉक को लेकर असमंजस
बांध स्थित रेस्ट हाउस में एक घण्टे तक चली बांध से मिट्टी व बजरी निकालने की बैठक के दौरान निकाली जाने वाली बजरी व मिट्टी स्टॉक को लेकर असमंजस की स्थिति रही। काफी मात्रा में निकलने वाली बजरी को आखिर कहां स्टॉक किया जाए। बांध के जलभराव के करीब की भूमि बांध के कुल जलभराव होने पर डूब जाती है।
शेष बची करीबी जमीन अधिकतर खातेधारकों की है। जो डूब क्षेत्र में नहीं आने से उनको मुआवजा नहीं दिया है।
ऐसे में करीबी क्षेत्र में चरागाह या फिर सिवायचक भूमि के साथ ही अन्य सरकारी जमीन या फिर परियोजना की खाली भूमि की तलाश शुरू कर दी गई है।
होगी आय, बढ़ेगा पानी
बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में ना तो पूर्व में बजरी का खनन हुआ और ना ही बांध बनने के बाद खनन हुआ। ऐसे में बांध के जलभराव से बजरी निकालने की योजना को हरी झण्डी मिलती है तो काफी मात्रा में बजरी निकाली जा सकेगी। इसकी रॉयल्टी आदि से राजस्व आय में इजाफा होने के साथ ही बांध की गहराई बढऩे से जलभराव की मात्रा में भी बढ़ोत्तरी होगी।
Published on:
09 May 2018 10:14 am
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