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video: विधानसभा में उठा सवाल तो जागे अधिकारी, राजमहल पहुंच राजस्व कर्मचारी कर रहे है सीमा ज्ञान

निवाई विधायक हीरा लाल रैगर ने विधानसभा में अनुसूचित जाति के लोगों के मकान ढ़हाने की कार्रवाई को लेकर प्रश्र किया था।
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 25 Feb 2018, 7:32 AM IST

सीमा ज्ञान

राजमहल में सीमा ज्ञान करने आये कर्मचारी व मौजूद कॉलोनी के लोग।

राजमहल. कस्बे के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान भूमि के अतिक्रमण के साथ ही इंदिरा आवास कॉलोनी के मकानों को लेकर विधानसभा में गत दिनों उठे सवाल को लेकर देवली उपखण्ड प्रशासन इन दिनों असमंजस में है। विधानसभा में उठे सवाल का जवाब देने के लिए शनिवार को राजस्व कर्मचारियों का दल राजमहल पहुंचा। जहां उन्होंने खेल मैदान भूमि व निकट ही बसी इंदिरा आवास कॉलोनी के मकानों का सीमा ज्ञान किया।

सीमा ज्ञान की जानकारी पर दर्जनों ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई जिन्होने विरोध प्रदर्शन किया मगर बाद में लोगों की ओर से की गई समझाईश पर लोग शांत हुये। उल्लेखनीय है कि राजमहल विद्यालय के खेल मैदान से अतिक्रमण हटाने के लिए विद्यालय प्रशासन की ओर से की गई शिकायतों के साथ ही खेल मैदान को लेकर अब तक दो बार सीमा ज्ञान हो चुका है। वही खेल मैदान के करीब अनुसूचित जाति की वर्षो पुरानी इंदिरा आवास कॉलोनी बसी हुई है।

जिसकों लेकर निवाई विधायक हीरा लाल रैगर ने विधानसभा में अनुसूचित जाति के लोगों के मकान ढ़हाने की कार्रवाई को लेकर प्रश्र किया था। वही विधायक ने बताया था कि उक्त कॉलोनी खेल मैदान भूमि के आवंटन से पूर्व ही राज्य सरकार के निर्देश पर पंचायत प्रशासन की ओर से आवंटित की गई थी। जिन्हे पट्टे भी वितरित किए गए थे मगर कुछ समय पश्चात ही उक्त भूमि के करीब खेल मैदान की भूमि भी आवंटन कर दी गई है।

उक्त अनुसूचित जाति के निर्धन लोगों को बैदखल करने से नाराज विधायक ने विधानसभा में प्रश्र उठाकर उक्त लोगों को यथावत रखने की मांग की गई है। उसी को लेकर शनिवार को राजस्व कर्मचारियों ने राजमहल पहुंचकर सीमा ज्ञान करने के साथ ही रिपोर्ट तैयार की गई है। उक्त रिपोर्ट विधानसभा में भेजी जाऐगी।


यह है मामला- राजमहल के देवीखेड़ा सडक़ के करीब चरागाह भूमि में राजकीय प्राथमिक विद्यालय के खेल मैदान के नाम पर 1970 में जिला कलेक्टर ने लगभग 4 बीघा भूमि खेल मैदान के नाम पर आवंटन की गई थी। उसी भूमि के पास तत्कालीन पंचायत प्रशासन ने राज्य सरकार के निर्देश पर 31 दिसम्बर 1974 को अनुसूचित जाति केे आवासीय भूमिहीन सौ से अधिक परिवारों को आवास के लिए निशुल्क पट्टे दिये गये थे।

जिसका नाम इंदिरा आवास कॉलोनी के नाम से रखा गया था। साथ ही प्रशासन ने उक्त कॉलोनी के दर्जनों परिवारों को 1983 में हुडकों योजना के तहत भवन निर्माण के लिए ऋण भी दिया गया था।

अधिकार से हटकर दिया पट्टा-
16 अप्रेल 1988 को तत्कालीन सरपंच ने अधिकारों के विरूद्ध माध्यमिक विद्यालय के नाम 92 हजार 800 वर्ग फूट जो लगभग चार बीघा चारागाह भूमि में खेल मैदान के नाम पट्टा जारी कर दिया। जबकि सरपंच चरागाह भूमि में एक फिट का भी पट्टा जारी तक नहीं कर सकता है।

मजेदार बात यह रही की उक्त दोनों पट्टों पर राजस्व विभाग ने आठ बीघा भूमि विद्यालय के नाम कर दी। अब सभी बातो को लेकर प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि आखिर मामला क्या है। इंदिरा कॉलोनी व खेल मैदान पास पास में स्थित है। अब प्रशासन किसे सही माने।

इनका कहना है-
विद्यालय की ओर से मिली शिकायतों व विधानसभा में उठे सवाल के जवाब को लेकर जांच करवाई जा रही है। मामले की सही जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी। रवि वर्मा उपखण्ड अधिकारी देवली। आर एम 2502 सीए व सीबी-राजमहल। सीमा ज्ञान करने आये कर्मचारी व मौजूद कॉलोनी के लोग।