
टोंक को रेल से जोडऩे को लेकर जयपुर में प्रदर्शन करते लोग।
टोंक. केन्द्र से स्वीकृत टोंक की रेल लाइन को लेकर शहर के लोगों ने शुक्रवार को विधानसभा का घेराव किया। उन्होंने राज्य सरकार के ओएसडी तथा कृषि मंत्री को ज्ञापन सौंपकर रेल के लिए जमीन अवाप्ति की मांग की।
ज्ञापन रेल लाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष अकबर खान के नेतृत्व में सौंपा गया। इससे पहले दो दर्जन वाहनों का काफिला धन्नातलाई से रवाना हुआ। ये काफिला बड़ा कुआं, काफला बाजार, पांचबत्ती, सुभाष बाजार होते हुए घंटाघर पहुंचा। जहां कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बाद वे विधानसभा के बाहर पहुंच गए।
जहां सुराज संकल्प यात्रा का चुनावी वादा पूरा करने समेत अन्य नारे लगाए गए। अकबर खान ने बताया कि टोंक की रेल भूमि अवाप्ति की घोषणा के लिए ओएसडी सांवरमल शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान ओएसडी ने कहा कि टोंक की रेल की मांग का ज्ञापन राज्य सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। वहीं कृषि मंत्री ने भी जिले वासियों को राज्य सरकार से मांग पूरी करवाने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर लोजपा जिलाध्यक्ष रामजस टाटावत, देवेंद्र भारती, रामसहाय चौधरी, प्रभु मेरोठा, कयामुद्दीन रंगरेज, अशोक विश्नोई, लक्ष्मी, ज्ञानी देवी, रेशमा खान, आरती, सोना, मोहम्मद इशाक, फिरोज खान, आशीष ग्वाला, अब्दुल मोईन आदि मौजूद थे।
गौरतलब है कि कांग्रेस की तत्कालीन केन्द्र सरकार ने टोंक की रेल के लिए पूरक बजट में घोषणा की थी। इसके बाद रेल विभाग ने फाइनल सर्वे की कार्रवाई पूरी कर ली, लेकिन राज्य सरकार जमीन अवाप्ति की घोषणा नहीं कर रही है। ऐसे में लोगों ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
सरपंच का निलंबन स्थगित
देवली. उच्च न्यायालय के आदेश पर देवली गांव सरपंच मंजू देवी का निलंबन आदेश स्थगित कर दिया गया है। इसके चलते सरपंच पुन: पंचायत कार्यों में भाग ले सकेगी। उल्लेखनीय है कि गत 7 फरवरी को पंचायतरात विभाग के संयुक्त सचिव ने आदेश जारी कर देवली गांव पंचायत सरपंच मंजू देवी को निलंबित किया था।
सरपंच निलंबन का कारण चुनाव के दौरान फर्जी शैक्षणिक योग्यता लगाना था। तब से सरपंच निलंबित चल रही थी। इसके बाद सरपंच ने राजस्थान उच्च न्यायालय में रिट पीटिशन दायर की। इसमें बताया कि याचिकाकर्ता पर केवल पुलिस चालान प्रस्तुत किया गया है, जिसमें आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत जांच हुई।
सरपंच को गलत तरीके से पंचायतराज अधिनियम की धारा 38 के तहत निलंबित किया है। जबकि अधिनियम 1994 की धारा 38 (4) के तहत निलंबित नहीं किया जा सकता है। इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को सरपंच का निलंबन स्थगित कर दिया। इसके चलते शुक्रवार को कार्यवाहक सरपंच पद के मनोनयन की प्रक्रिया भी निरस्त हो गई है।
निलंबन के बाद कलक्टर ने सरपंच पद पर आरक्षित श्रेणी की महिला वार्ड पंच को सरपंच का अतिरिक्त चार्ज देने का आदेश जारी किया था। विकास अधिकारी कुशलेश्वर सिंह का कहना है सरपंच का निलंबन स्थगित हो गया है। उधर, सरपंच व उनके समर्थकों ने निलंबन स्थगन के बाद मिठाई बांटकर खुशियां मनाई।
Published on:
24 Feb 2018, 12:42 PM IST
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