
खजूर में मिले 3 नई किस्मों के पेटेंट। फोटो: पत्रिका
टोंक। वर्षों की शोध-अनुसंधान और कृषि नवाचार के बाद पूर्व कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी की ओर से विकसित स्वदेशी पिंड़ खजूर की तीन किस्में (एसटी-1, एसटी-2, एसटी-3) अब भारत सरकार की ओर से पेटेंट की गई हैं। यह कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि है, जिसने राजस्थान को देश में अग्रणी स्थिति पर स्थापित किया है।
विश्व में पिंड़ खजूर की लगभग 150 किस्में और भारत में 15 किस्में पाई जाती हैं। डॉ. सैनी ने पौधे के अंकुरण से लेकर फल आने तक गहन अनुसंधान कर तीन किस्मों को विकसित किया। इसके बाद कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर, बीकानेर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने इन किस्मों का परीक्षण और प्रमाणन किया। तीन किस्मों का मुख्य उद्देश्य किसानों को पोषक तत्वों से भरपूर खजूर के फल उपलब्ध कराना है।
यह नई किस्म राजस्थान में स्थानीय स्तर पर उगाई जा सकेगी, जिससे अब किसानों और कृषि विशेषज्ञों के लिए देश में पहली बार स्वदेशी पोषक खजूर उपलब्ध होगा। इससे अब विदेशी आयात की आवश्यकता भी कम होगी। आवां निवासी डॉ. सैनी को उनके योगदान के लिए कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर ने डॉक्टर मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया है। इस उपलब्धि पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और अन्य प्रदेश पदाधिकारियों की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी को पुष्प गुच्छ भेंटकर बधाई दी गई।
भारत सरकार ने पौधा किस्म संरक्षण और कृषक अधिकार अधिनियम 2001 के तहत एसटी-1, एसटी-2 और एसटी-3 किस्मों के उत्पादन, विपणन, वितरण, आयात व निर्यात सहित किसी अन्य व्यक्ति को प्राधिकृत करने का अधिकार भी प्रदान किया है।अब ये तीन किस्में टिश्यू कल्चर के माध्यम से देशभर की निजी और सरकारी लैब में तैयार की जाएंगी। इस नवाचार से राजस्थान कृषि क्षेत्र में नई पहचान और किसानों को आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
Published on:
02 Jan 2026 02:43 pm
बड़ी खबरें
View Allटोंक
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
