जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई संदेह के घेरे में, हमले के आरोपियों से पूछताछ तक नहीं की

tonk crime news जानलेवा हमले के मामले में उनियारा थाना पुलिस ने 6 महीने बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ तक नहीं की है। इससे पुलिस कार्रवाई संदेह के घेरे में नजर आ रही है। इसकी शिकायत लोगों ने पुलिस महानिदेशक, अजमेर रेंज आईजी समेत पुलिस अधीक्षक से की है।

By: pawan sharma

Published: 28 Jun 2019, 02:02 PM IST

टोंक. नगरफोर्ट में हुई भजनलाल मीणा की हत्या के मामले में सुर्खियों में रही उनियारा थाना पुलिस Uniara police station की अनदेखी फिर से सामने आई है। ये अनदेखी उनियारा थाना पुलिस जानलेवा हमले deadly attack के मामले में बरती है।

 

पुलिस Police ने मामले में 6 महीने बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार arrested करना तो दूर पूछताछ तक नहीं की है। इसकी शिकायत लोगों ने पुलिस महानिदेशक , अजमेर रेंज आईजी Ajmer Range IG समेत पुलिस अधीक्षक से की है।

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इसके मुताबिक उनियारा थाना पुलिस आरोपियों को बचाने में जुटी है। इससे पुलिस कार्रवाई Police action संदेह के घेरे में नजर आ रही है। दूसरी और इस मामले में चौंकाने वाली बात ये भी है कि जो व्यक्ति घायल हुआ उसे उनियारा अस्पताल के चिकित्सकों ने जानवर से काटना बताकर जयपुर Jaipur रैफर कर दिया, लेकिन जयपुर के एक अस्पताल ने उसे किसी धारदार हथियार Bladed weapon से हमला बताया है।

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इधर, नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद उनियारा थाना पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। मामला 6 जनवरी 2019 का है। उस दिन रसूलपुरा थाना उनियारा निवासी कजोड़मल पुत्र धूलीराम कुमावत फसल की रखवाली करने गया था। इस दौरान किसी मामले को लेकर गांव के ही प्रहलाद, सुरेश आदि ने जानलेवा हमला कर दिया।

 

सूचना के बाद पहुंची परिजनों ने उसे उनियारा चिकित्सालय में भर्ती कराया। जहां चिकित्सक ने उसे किसी जानवर के काटने को बता जयपुर रैफर कर दिया, लेकिन परिजनों तथा घायल कजोड़ ने नामजद आरोपियों के खिलाफ बयान तथा रिपोर्ट दर्ज कराई।

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इसके बावजूद पुलिस ने अब तक आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ तक नहीं की। ऐसे में कुछ दिनों पहले नाराज ग्रामीणों ने जाम भी लगाया था।

 

इसमें पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन पुलिस फिर से मामले में अनदेखी बरत रही है। इधर, उनियारा थाना प्रभारी से मामले की जानकारी लेनी चाही, लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं की। एक बार रिसिव किया तो मामले को सुनकर फोन काट दिया।

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सवाल मांगते जवाब
- मामला 6 जनवरी का है, लेकिन पुलिस ने अभी आरोपियों से पूछताछ नहीं की
- 6 महीने बाद भी पुलिस ने मामले में चालान पेश नहीं किया
- नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद आरोपी पुलिस पकड़ से दूर
- मामला झूठा था तो एफआर नहीं लगाई गई
- लगातार पीडि़त शिकायत कर रहा है, लेकिन आश्वासन ही दे रही है

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