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Rajasthan Election 2023 : दावेदारों की उड़ रही रातों की नींद, टिकट पर लगी टकटकी

Rajasthan Assembly Election 2023 : जिले में विधानसभा चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंचने वाला है। दोनों ही दलों में टिकट की घोषणों को लेकर कशमकश चल रही है।

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टोंक

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Nupur Sharma

Oct 14, 2023

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राकेश वर्मा
टोंक। Rajasthan Assembly Election 2023 : जिले में विधानसभा चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंचने वाला है। दोनों ही दलों में टिकट की घोषणों को लेकर कशमकश चल रही है। जिले की चार विधानसभा में से सिर्फ एक सीट देवली-उनियारा पर ही भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किया है। बाकी तीनों सीटों पर घोषणा होना बाकी है। जबकि कांग्रेस की ओर से चारों सीटों में से एक पर भी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। चुनाव मैदान में उतरने वाले कई दावेदार टिकट पर टकटकी लगाकर बैठे हैं। कई तो टिकट के जुगाड़ के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। उनकी रातों की नींद उड़ी हुई है। क्योंकि कई तो पिछले पांच साल से क्षेत्र में सक्रिय होकर काम कर रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलता है तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

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टोंक विधानसभा: बीजेपी ढूंढ रही पायलट का विकल्प
इस विधानसभा में कांग्रेस की ओर से मौजूदा उन्नीस लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया है। मौजूदा विधायक सचिन पायलट भी यहां से चुनाव लड़ने का ऐलान कार्यकर्ताओं के बीचकर चुके हैं। इसी प्रकार भाजपा में भी लिस्ट काफी लम्बी है। ज्यादातर स्थानीय दावेदार ज्यादा हैं। इनमें एक पूर्व विधायक, पूर्व नगर परिषद सभापति सहित कई लोग दौड़ में है। भाजपा सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतार रही है। ऐसे में कयास ये भी लगाया जा रहा है कि पायलट को चुनौती देने के लिए किसी गुर्जर सांसद को भी यहां से चुनाव लड़ा सकती है। पिछली बार बीजेपी ने पूर्व मंत्री युनुस खान को पायलट को टक्कर देने के लिए उतारा था, लेकिन उनको करारी हार मिली थी। लेकिन दोनों ही पार्टियों के लिए ये सीट हॉट है। वहीं दोनों दलों में पहले आप- पहले आप वाली स्थिति हो रही है।

देवली उनियारा विधानसभा: कांग्रेस भी फूंक-फूंक कर रख रही कदम
इसी सीट से भाजपा ने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के पुत्र विजय बैंसला को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। हालांकि इसको लेकर पार्टी के पूर्व विधायक के समर्थकों की ओर से स्थानीय को टिकट देने की मांग की जा रही है। हालांकि पार्टी डेमेज कंट्रोल कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से इस सीट पर उम्मीदवार को लेकर मंथन में जुटी है। वे विरोध का खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में पांव फूंक फूंक कर रख रही है। इस सीट पर गुर्जर मतदाताओं के मुकाबले मीणा मतदाता भी कम नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि पिछले तीन चुनावों की तरह कांग्रेस मीणा मतदाताओं को ही साधने का प्रयास करेगी। मौजूद विधायक हरीश मीणा के अलावा, एक पूर्व अधिकारी, महिला सरपंच सहित अन्य दावेदार भी टिकट की कतार में हैं।

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मालपुरा विधानसभा: जिले की घोषणा कर जलाया उम्मीद का दीया
ये सीट भाजपा के लिए सेफ सीट मानी जा रही है। क्योंकि पिछले दो चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को ही जीत मिली है। यहां से कन्हैयालाल चौधरी लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। वहीं चौधरी इस बार भी टिकट की दौड़ में है और तिकड़ी लगाने की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि भाजपा के पास अन्य उम्मीदवार भी स्थानीय उम्मीदवार है। हालांकि कांग्रेस के मुकाबले विकल्प कम हैं। बाहरी प्रत्याशी को भी उतार सकती है। कांग्रेस की ओर से टिकट मांगने वालों में बीसूका उपाध्यक्ष, एक बिजनेस मैन, पूर्व आरएएस अधिकारी, पूर्व उप जिला प्रमुख, एक चिकित्सक आदि भी शामिल हैं। कांग्रेस इस सीट पर तीस साल से नहीं जीत पाई है। ऐसे में चुनाव आचार संहिता से ठीक पहले कांग्रेस सरकार ने मालपुरा को जिला बनाने की घोषणा कर जीत की उम्मीद लगाई है। लेकिन कांग्रेस का ये दाव चुनाव में कितना कारगर साबित होगा, ये आने वाला वक्त ही बताएगा।

निवाई विधानसभा:
इस सीट पर भी मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है। वर्तमान में यहां कांग्रेस काबिज है। मौजूदा विधायक प्रशांत बैरवा हैं। कांग्रेस से वर्तमान विधायक के अलावा कई दावेदार टिकट की फेहरिस्त में है। इनमें एक पूर्व विधायक, सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता प्रकोष्ठ पीसीसी के पूर्व महासचिव आदि शामिल हैं। इसके अलावा बीजेपी में दावेदारों की संख्या अधिक है। बीजेपी में एक पूर्व आईएएस, एससी मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, पूर्व प्रत्याशी, जिला महामंत्री आदि इस सूची में शामिल है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर दोनों ही दल विजय प्रत्याशी पर मंथन कर रहे हैं। वैसे इस सीट को रैगर एवं बैरवा मतदाता बाहुल्य माना जाता है। वर्ष 2013 के चुनाव में हीरालाल रैगर भाजपा से विधायक चुने गए थे। वहीं 2018 में प्रशांत बैरवा विधायक निर्वाचित हुए थे। जातिगत आंकड़ों के हिसाब से भाजपा-कांग्रेस अपने प्रत्याशी तय कर सकती है।

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