
Rajasthan Ex BJP MP Sukhbir Singh Jaunapuria Video viral (viral video photo)
Rajasthan Ex BJP MP Sukhbir Singh Jaunapuria Video viral: राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से दो बार सांसद रहे बीजेपी नेता सुखबीर सिंह जौनापुरिया एक बार फिर विवादों में हैं। निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग गांव में आयोजित एक कंबल वितरण कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में पूर्व सांसद महिलाओं से नाम पूछकर उनसे कंबल वापस लेते नजर आ रहे हैं।
रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे करेड़ा बुजुर्ग गांव के सीताराम जी मंदिर परिसर में कंबल वितरण का कार्यक्रम रखा गया था। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में जरूरतमंद महिलाएं वहां पहुंची थीं। चश्मदीदों के अनुसार, शुरुआत में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जैसे ही पूर्व सांसद ने एक महिला से उसका नाम पूछा, माहौल पूरी तरह बदल गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जौनापुरिया एक महिला से उसका नाम पूछते दिख रहे हैं। जब महिला ने अपना नाम 'सकुरान खान' बताया, तो सांसद नाराज हो गए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, जो आप लोग बैठते हैं न, जो मोदी को गाली देने वाला है, उसे ये कंबल लेने का हक ही नहीं है। चाहे किसी को भी बुरा लगे। आप कंबल ले जाओगे तो कहोगे कि बेवकूफ बना दिया। इसलिए इसे यहीं छोड़ दो और हटो यहां से।
आरोप है कि इसके बाद सकुरान, रजिया और जुबैदा जमी जैसी अन्य मुस्लिम महिलाओं को भी कंबल नहीं दिए गए और जिन्हें मिल चुके थे, उनसे वापस छीन लिए गए। जब वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने इस व्यवहार पर आपत्ति जताई, तो जौनापुरिया ने दो टूक जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम था, कोई सरकारी योजना नहीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, आपको बुलाकर बैठाना है तो बैठाइए, मेरा तो (कंबल) नहीं है। बहस की जरूरत नहीं है।
पूर्व सांसद के इस व्यवहार के बाद गांव के माहौल में तनाव तो आया, लेकिन शाम होते-होते मानवीय संवेदनाओं की जीत हुई। रात करीब 8:30 बजे कांग्रेस नेता विक्रम चौधरी, पूर्व सरपंच मदन चौधरी और अन्य ग्रामीणों ने उसी गांव में उन मुस्लिम महिलाओं का सम्मान किया जिनसे कंबल वापस लिए गए थे।
विक्रम चौधरी ने कहा, इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। किसी जरूरतमंद के साथ ऐसा व्यवहार राजनीति की गिरी हुई शक्ल है। यहां वोटों की राजनीति का कोई स्थान नहीं है।
यह वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे भाजपा की भेदभावपूर्ण राजनीति बता रहा है, वहीं सोशल मीडिया यूजर्स भी इस पर बंटे हुए हैं। कुछ लोग इसे निजी संपत्ति का अधिकार बता रहे हैं, तो कुछ इसे जनप्रतिनिधि की गरिमा के खिलाफ मान रहे हैं।
Updated on:
23 Feb 2026, 9:28 AM IST
Published on:
23 Feb 2026, 9:27 AM IST
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