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राजस्थान के इस बांध का नहरी तंत्र 140 साल बाद होगा अपग्रेड, 100 करोड़ आएगी लागत; 64 गांवों को सालभर मिलेगा पानी

Tordi Sagar Dam: रियासतकाल में वर्ष 1887 में निर्मित टोरडी सागर बांध का नहरी तंत्र अब करीब 140 वर्ष बाद सुदृढ़ किया जाएगा।

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टोंक

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Anil Prajapat

Feb 26, 2026

Tordi Sagar Dam

टोरडी सागर बांध। फोटो: पत्रिका

Tordi Sagar Dam Canal Upgrade: टोडारायसिंह। रियासतकाल में वर्ष 1887 में निर्मित टोरडी सागर बांध का नहरी तंत्र अब करीब 140 वर्ष बाद सुदृढ़ किया जाएगा। राज्य सरकार ने हालिया बजट घोषणा में बांध एवं उससे जुड़े नहर तंत्र की मजबूती के लिए 100 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। योजना के तहत बांध को मजबूत करने के साथ साउथ, नॉर्थ और मिडिल कैनाल को पक्का किया जाएगा।

यह कार्य आगामी ईआरसीपी योजना (ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट) से पूर्व किया जाएगा, ताकि अतिरिक्त जल प्रवाह को सुरक्षित रूप से संचालित किया जा सके। योजना के पूर्ण होने पर कमांड क्षेत्र में वर्षभर सिंचाई की संभावना बढ़ेगी, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

175 किमी क्षेत्र में फैला है नहरी तंत्र

30 फीट भराव क्षमता वाले इस ऐतिहासिक टोरडी सागर बांध से तात्कालीन समय में तीन प्रमुख नहरों -साउथ कैनाल, नॉर्थ कैनाल और मिडिल कैनाल का निर्माण किया गया था। लगभग 175 किलोमीटर परिधि में फैली इन नहरों से वर्तमान में मालपुरा, टोडारायसिंह, पीपलू व टोंक तहसील के 64 गांवों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है।

ओवरफ्लो से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ तंत्र

वर्ष 1996 के बाद हाल के दो वर्षों में बांध के लगातार पूर्ण भराव और ओवरफ्लो की स्थिति में सहोदरा नदी में अत्यधिक बहाव के कारण नहर तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा। कमांड क्षेत्र के अंतिम छोर तक कई स्थानों पर नहरें टूट गईं। करीब 15 किमी क्षेत्र में तेज बहाव से कच्ची-पक्की नहरें ध्वस्त हो गईं।

सहोदरा नदी में कड़ीला के निकट बना साइफन, नॉर्थ कैनाल के 35 चैन पर निर्मित साइफन तथा मिडिल कैनाल पर निर्मित कुडक्ट (पुलिया) क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बजट के अभाव में विभाग मरम्मत कराने में असमर्थ था। ऐसे में बांध भरने के बावजूद किसानों तक सिंचाई जल पहुंचाना चुनौती बना हुआ था।

ईआरसीपी से जुड़ेगा प्रोजेक्ट

जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की अभिशंसा पर राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। ईआरसीपी योजना लागू होने के बाद बीसलपुर बांध का अतिरिक्त पानी टोरडी सागर सहित घारेड़ा सागर, चांदसेन बांध व अन्य जलाशयों में डाला जाएगा। ऐसे में पूर्व सुदृढ़ीकरण आवश्यक माना गया है। इसी क्रम में हालही बजट में मालपुरा विधानसभा के तहत मालपुरा स्थित प्राचीन बम्ब तालाब, मोर व भासू स्थित सार्वजनिक तालाब के सुदृढीक़रण को लेकर करीब 8 से 10 करोड़ रूपए खर्च होंगे।

पहले भी बने थे गंभीर हालात

वर्ष 1996 में करीब चार फीट से अधिक चादर चलने पर पास से गुजर रही रेलवे पटरी और टोडा-मालपुरा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। वर्ष 2024-25 में पुन: ओवरफ्लो की स्थिति में साढ़े तीन से चार फीट तक चादर चली, जिससे टोडारायसिंह-मालपुरा मार्ग करीब डेढ़ माह तक बाधित रहा।

बीते दशक का जलभराव (फीट में)

2014 में 27, 2015 में 13.5, 2016 में 13, 2017 में 3.9, 2018 में 10, 2019 में 23.9, 2020 में 22.11, 2021 में 13.11, 2022 में 27.3, 2023 में 22, 2024 में 30 प्लस 3.50 फीट चादर, 2025 में 30 प्लस 4 फीट ओवरफ्लो (लगातार दो माह)।
इस योजना से क्षेत्र में स्थायी सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है।

इनका कहना है

हाल ही राज्य बजट में घोषित 100 करोड़ रुपए की राशि के अंतर्गत टोरडी सागर बांध के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए विस्तृत तकमीना तैयार किया जा रहा है। योजना में बांध की इंटरनल प्रोटक्शन वॉल, चादर के आगे पिचिंग सेफ्टी वॉल निर्माण, स्टेट हाइवे के समीप ओवरफ्लो निकासी के लिए सेफ्टी चैनल निर्माण सहित मीडिल कैनाल तथा साउथ व नॉर्थ मुख्य नहरों के सुधार कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 175 किलोमीटर परिधि के कमांड क्षेत्र में माइनरों को पक्का करने का भी प्रस्ताव है, जिससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को लाभ मिलेगा। बजट स्वीकृति मिलते ही कार्य शीघ्र प्रारंभ कर दिए जाएंगे।
-महिपाल सिंह, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, मालपुरा