
नरेश मीणा। पत्रिका फाइल फोटो
टोंक। एसडीएम थप्पड़ कांड से चर्चा में आए भगत सिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा आज नगरफोर्ट पुलिस थाने में आत्मसमर्पण करेंगे। समर्थकों के साथ नरेश मीणा के पहुंचने के कार्यक्रम को लेकर टोंक पुलिस प्रशासन सतर्क है। समर्थकों की भीड़ जुटने की संभावनाओं को देखते हुए जिला कलक्टर टीना डाबी ने टोंक शहर, देवली और उनियारा क्षेत्र में धारा 163 लागू की। बता दें कि न्यायालय ने नरेश मीणा की जमानत रद्द कर 6 अगस्त तक आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए है।
देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता में हुई हिंसा में नरेश मीणा को मुख्य आरोपी बनाया गया था। करीब 8 महीने हिरासत में रहने के बाद उच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को उन्हें शर्तों के साथ जमानत दी थी। शर्तों में किसी भी धरना-प्रदर्शन में शामिल न होना और स्वागत-सत्कार से दूर रहना शामिल था। आरोप है कि उन्होंने इन शर्तों का उल्लंघन किया।
पिछले साल झालावाड़ के पीपलोदी में स्कूल भवन की छत गिरने से बच्चों की मौत के बाद किए गए आंदोलन पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ। इसी आधार पर नगरफोर्ट पुलिस ने न्यायालय में जमानत रद्द करने की याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। इस मामले में नरेश मीणा सहित करीब 60 लोगों के खिलाफ प्रकरण चल रहा है। सभी फिलहाल जमानत पर है। वहीं, एक अन्य मामले में विशेष न्यायालय के आदेश पर नगरफोर्ट पुलिस ने सख्ती दिखाई है।
नरेश मीणा के थाने में सरेंडर से पहले टोंक जिला प्रशासन ने उपखंड टोंक, उनियारा और देवली में धारा 163 लागू कर दी है। जिला कलक्टर टीना डाबी ने पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर यह आदेश जारी किया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में समर्थकों के नगरफोर्ट थाने पहुंचने के आह्वान और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया गया है। आदेश के तहत बिना अनुमति 5 या 5 से अधिक लोगों के एकत्रित होने, धरना-प्रदर्शन, जुलूस और सभा करने पर रोक रहेगी। सार्वजनिक स्थानों पर हथियार लेकर चलने और प्रदर्शन करने पर भी प्रतिबंध रहेगा। ध्वनि प्रसारण यंत्र के उपयोग के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। हालांकि, बारात, शवयात्रा, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों तथा निर्धारित श्रेणियों को आदेश से छूट दी गई है।
देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान 13 नवंबर 2024 को समरावता गांव के लोगों ने उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। आरोप है कि जबरन तीन लोगों से मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। 14 नवंबर को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया।
करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत पर रिहा किया था। पिछले साल 25 जुलाई को झालावाड़ जिले के पिपलोदी में सरकारी स्कूल की इमारत ढहने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा ने एसआरजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया था, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। नगरफोर्ट थाना पुलिस ने हाईकोर्ट की जमानत शर्तों के उल्लंघन का आधार बनाते हुए एससी-एसटी कोर्ट में उनकी जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई थी। पिछले महीने ही 13 जुलाई को एससी-एसटी मामलों की विशेष अदालत टोंक ने नरेश मीणा की जमानत अर्जी निरस्त करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। ऐसे में अब नरेश मीणा को पुलिस के सामने सरेंडर करेंगे।
Updated on:
06 Aug 2026 11:29 am
Published on:
06 Aug 2026 11:29 am
