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पढ़ाई हो रही बाधित, बिन किताबेें, कैसे आगे बढ़ेें विद्यार्थी?

शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सरकारी विद्यालयों में पढऩे वाले पहली से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकोंं का वितरण किया जाता है।  

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Distribution of textbooks

अभी भी एक तिहाई विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं किया जा सका।

टोंक. माध्यमिक समेत प्रारम्भिक विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए डेढ़ माह का समय बीत चुका, लेकिन अभी भी एक तिहाई विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं किया जा सका। ऐसे में कुछ विद्यार्थियों ने तो दुकानों से पुस्तकें खरीद ली वहीं वंचित भी खरीदने का मानस बना रहे है।

शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सरकारी विद्यालयों में पढऩे वाले पहली से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकोंं का वितरण किया जाता है। नोडल केन्द्रों के माध्यम से जिले के सभी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को जुलाई के प्रथम सप्ताह तक किताबों का वितरण किया जाना आवश्यक है।

इसके बावजूद नामांकित विद्यार्थियों के अनुपात में किताबें नहीं आने से अध्ययन प्रभावित हो रहा है। टोडारायसिंह निवासी अमृतराज ने बताया कि विद्यालय में किताबें नहीं मिलने से पुत्री दूसरे विद्यार्थियों की किताबे मांगकर पढ़ाई कर रही है।

विद्यालयों की कहानी
जिले में 692 प्राथमिक विद्यालय, 514 राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, 11 संस्कृत प्राथमिक व 25 राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय हैं। इसी प्रकार 5 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, 235 राजकीय उच्च माध्यमिक, 72 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें अधिकांश में कक्षा एक से नवीं तक की पुस्तकों का अभाव है।


यह रहा कारण
पुस्तकों के सेट कम आने से व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। संस्था प्रधानोंं का मानना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव से व अन्य कारणों से नई किताबों की आवश्यकता है। इसके साथ ही इस बार माध्यमिक स्तरीय विद्यालयों में नामांकन बढऩे से भी यह स्थिति बनी है। ऐसे में संस्था प्रधानों ने फिर से पाठ्यपुस्तकों के मांग-पत्र भेजे हैं।


ये हुआ नामांकन
इस वर्ष प्रारम्भिक शिक्षा में प्रवेशोत्सव के दोनों चरणों में 6898 व माध्यमिक शिक्षा में भी नौ हजार से अधिक विद्यार्थियों का नवीन प्रवेश हुआ है।

कोर्स ही कम आए हैं
राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय सिविल लाइन टोंक के प्रधानाध्यापक लादूलाल चौधरी ने बताया कि सातवीं व आठवीं के कोर्स आगे से ही कम मिले हैं। ऐसे में पूरे विद्यार्थियों को किताबों का वितरण नहीं हो सका। विभाग को मांग-पत्र भेजा है।

विद्यार्थियों की आवश्यकता अनुसार पाठ्यपुस्तक मण्डल से पुस्तकों की मांग भेजी हुई है।
शंकरलाल जाट,
जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक टोंक।

नामांकन अनुसार मिले
विद्यालयों में किताबें विद्यार्थियों के नामांकन के अनुपात में जून के अन्तिम सप्ताह में ही दे दी जानी चाहिए, जिससे विद्यार्थी समय से प्रथम परख की तैयारी कर सके।
ज्ञानसिंह सांसी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत) टोंक


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