
बनेठा क्षेत्र में ओलावृष्टि से प्रभावित फसल। फोटो: पत्रिका
टोंक। राजस्थान के टोंक जिले में पिछले दिनाें हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस स्थिति को देखते हुए जिला कलक्टर टीना डाबी ने 4 अप्रेल को अतिरिक्त मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग, जयपुर को पत्र भेजकर विशेष गिरदावरी कराने की अनुमति मांगी है।
कलक्टर के पत्र के अनुसार प्राथमिक आकलन में टोंक जिले की 10 तहसीलों में से नगरफोर्ट, मालपुरा और टोडारायसिंह तहसील के कुल 88 गांव प्रभावित पाए गए हैं। नगरफोर्ट तहसील के 50 गांवों में 33 से 50 प्रतिशत से लेकर 75 से 100 प्रतिशत तक फसल नुकसान का अनुमान है। मालपुरा तहसील के 32 गांवों में 20 से 80 प्रतिशत तक नुकसान दर्ज किया गया है, जिसमें गेहूं और चना में 70 से 80 प्रतिशत, सरसों में 35 से 40 प्रतिशत तथा जौ में 50 से 60 प्रतिशत तक खराबा शामिल है।
वहीं, टोडारायसिंह तहसील के 6 गांवों में 33 से 50 प्रतिशत से लेकर 75 से 100 प्रतिशत तक फसल क्षति की संभावना जताई गई है। जिला कलक्टर ने कहा है कि इन चिह्नित गांवों में वास्तविक नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी आवश्यक है। गिरदावरी पूरी होने के बाद फसल खराबा पैरा 7 डी रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र सरकार को भेजी जाएगी।
लगातार वर्षों से खरीफ और रबी सीजन में अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और पश्चिमी विक्षोभ के प्रकोप से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। महंगी जुताई, बुवाई और मेहनत के बावजूद फसलें नष्ट होने से किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई है। टोंक जिले में रबी सीजन में चना, गेहूं, जौ और सरसों की फसलें ओलावृष्टि और अंधड़ से चौपट हो गईं। खरीफ सीजन में भी अतिवृष्टि के कारण शत-प्रतिशत फसलें नष्ट हो गईं। उन्होंने कहा कि किसानों को फसल बीमा की प्रीमियम जमा करवाने के बावजूद मुआवजा राशि समय पर नहीं मिल रही है।
चौधरी ने बताया कि वर्ष 2023-24 और 2025 की सहायता राशि अभी तक किसानों के खातों तक नहीं पहुंची है। खरीफ 2024 का हजारों किसानों का मुआवजा अटका हुआ है, जबकि खरीफ 2025 का एक भी किसान को भुगतान नहीं हुआ। उन्होंने जिला कलक्टर से मांग की है कि शीघ्र गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर राजस्थान सरकार को भेजी जाए और आपदा राहत कोष से किसानों के खाते में राशि डाली जाए।
किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर चौधरी ने बताया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सातवें दिन ही किसानों के खातों में मुआवजा राशि पहुंचा दी थी। यदि हुड्डा कमेटी की रिपोर्ट लागू हो जाती तो किसानों को 50 हजार रुपए प्रति एकड़ मिलते, जिससे उनकी पीड़ा कुछ कम हो सकती थी।
Updated on:
07 Apr 2026 10:18 am
Published on:
07 Apr 2026 10:17 am
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