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वनस्थली विद्यापीठ का 34वां दीक्षान्त समारोह: गुरु का स्थान नहीं ले सकता गूगल- उपराष्ट्रपति नायडू

उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि गुरु से बढक़र गूगल नहीं हो सकता। जो शिक्षा गुरु से मिलती है वह कोई और नहीं दे सकता।

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टोंक

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kamlesh sharma

Jan 07, 2018

Venkaiah Naidu

Venkaiah Naidu

टोंक/निवाई। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि गुरु से बढक़र गूगल नहीं हो सकता। जो शिक्षा गुरु से मिलती है वह कोई और नहीं दे सकता। उपराष्ट्रपति ने यह बात रविवार को वनस्थली विद्यापीठ में आयोजित 34वें दीक्षान्त समारोह में कही। उन्होंने कहा कि छात्राएं भी देश का नाम रोशन कर रही है, लेकिन उन्हें पंच मुखी शिक्षा पद्धति को कभी नहीं भूलना चाहिए। इसमेें पहली मां है। मां ही हमें संस्कार और दुनियां के कामों से अवगत कराती है। मां शब्द दिल से निकलता है, जबकि मॉम शब्द में होठ हिलते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा जन्म भूमि, मातृ भाषा, मातृ भूमि और गुरु का सदैव याद रखना चाहिए। मातृ भाषा पर उन्होंने कहा कि यह हमारी आंख है, दूसरी भाषा बोलना चश्मा लगाने जैसा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के तीन मंत्र रि-फॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म देश को आगे ले जाने में सहायक रहेंंगे।

हमें आतंरिक कलह को खत्म करना होगा। यह हमारी सुन्दरता पर बदनुमा दाग है। सभी को सपने देखने चाहिए। सपने पूरे करने के लिए लक्ष्य भी होना चाहिए। इसके बाद ही मुकाम पाया जा सकता है। पंचमुखी शिक्षा पद्धति के माध्यम से शिक्षा का सम्पूर्ण विकास किया जा सकता है।

समग्र, जीवनदायिनी और चरित्र निर्माण वाली शिक्षा होनी चाहिए। वनस्थली विद्यापीठ की पंचमुखी शिक्षा पद्धति समग्र शिक्षा प्राप्त करने का एक नवोन्मेषी तरीका है। यह पद्धति शिक्षा को सामाजिक एवं सांस्कृतिक परवेश से जोडऩे की प्रेरणा देती है।

महिलाओं को आगे बढ़ाया
उन्होंने कहा कि देश में जब लड़कियां साइकिल चलाना सीख रही थी, तब विद्यापीठ ने यह सुनिश्चित किया कि हमारी बेटियां घुड़सवारी, ग्लाइडर और हवाई जहाज उड़ाकर आसमान की बुलन्दियों को छूएं। बदलते युग में जब महिलाएं व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद साधारण पदों पर नियुक्त होने लगी, तब विद्यापीठ ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट अवनी चतुर्वेदी जैसी छात्रा को तैयार किया।

अवनी ने भारतीय वायुसेना में प्रथम महिला लड़ाकू विमान चालक बनने का गौरव प्राप्त किया है। यही नहीं हमारे यहां तो महत्वपूर्ण विभाग भी अधिकतर देवियों के पास है। जैसे कि शिक्षा का जिम्मा सरस्वती देवी, रक्षा का जिम्मा दुर्गा और धन का जिम्मा लक्ष्मी देवी के पास है।

यहां की नदियां गंगा, यमुना, कावेरी, नर्मदा, सरस्वती तक महिलाओं के नाम से जानी जाती है। केन्द्रीय मंत्रीमंडल को देखें तो रक्षा और विदेश मंत्रालय का जिम्मा महिलाएं ही निभा रही है। दोनों बेहतर काम ? भी कर रही है। उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के लिए कहा कि पाकिस्तान के मामले में उन्होंने करारा जवाब दिया जो प्रशंसनीय है।

उपराष्ट्रपति ने महिलाओं को आरक्षण देने की वकालत करते हुए कहा कि महिलाएं राजनीति में भी बेहतर काम कर सकती है, उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। कुछ लोग महिला आरक्षण का विरोध करते हैं। कुछ पंचायतों में महिलाओं की जगह उनके पति पंचायत करते है। यदि महिला को मौका दिया जाए तो फिर देखें कि पति की क्या ‘गति’ होती है।

वाजपेयी की देन
उन्होंने कहा कि गांवों का विकास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की देन है। वाजपेयी ने प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना लागू कर गांवों को शहरों के समान खड़ा कर दिया। खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से हैं। कच्चे रास्ते से तीन किलोमीटर पैदल चलकर पढऩे जाते थे। आज हर गांव सडक़ से जुड़ा है। यह क्रांतिकारी परिवर्तन है। उन्होंने आह्वान किया कि आज देश में सब कुछ है। देश की प्रतिभाओं को अब विदेश जाने की जरूरत नहीं है। वे विदेश जाएं, पढ़े, सीखें और वापस आकर देश के विकास में योगदान दें।

भूमिकाओं को निभाया
विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आदित्य शास्त्री ने कहा कि व्यक्ति को किसी एक क्षेत्र में सफल होते देखा जा सकता है, लेकिन आश्चर्य होता है कि उपराष्ट्रपति ने कई भूमिकाओं को सफलतापूर्वक निभाया है। उन्होंने कहा कि वनस्थली की सादगी, विनम्रता व शीलता की विचारधारा भारतीय राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रयिता के दो स्तम्भों पर खड़ी है। विद्यापीठ ने 1935 में यह यात्रा शुरू की। संस्थापकों ने घर-घर जाकर छात्राओं को अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इसके चलते संस्था आज विश्व की सबसे बड़ी महिला आवासीय विश्वविद्यालय बन गई है। जहां करीब 15 हजार छात्राएं अध्ययनरत है।

3843 का सम्मान
इस अवसर पर विभिन्न संकायों में 3 हजार 843 छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गई। इनमें से 282 दीक्षार्थियों को पीएचडी की उपाधि तथा 99 छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। इससे पहले समारोह की शुरुआत सुबह करीब 11 बजे राष्ट्रगान से हुई। परम्परा के अनुसार मंगलाचरण एवं वनस्थली गीतिका के बाद कुलपति ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। सुबह करीब 10.15 बजे उपराष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से मारूत मैदान हेलीपेड पर उतरे।

जहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी, सांसद सुखबीरसिंह जौनापुरिया, जिला प्रमुख सत्यनारायण चौधरी, विधायक राजेन्द्र गुर्जर, कुलपति प्रो. आदित्य शास्त्री, विद्यापीठ अध्यक्ष प्रो. चित्रा पुरोहित, उपाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ शास्त्री ने उपराष्ट्रपति का स्वागत किया।

स्वागत द्वार पर वनस्थली सेवादल के बैण्ड ने राष्ट्रीय सलामी दी। इसके बाद मुख्य अतिथि नायडू, श्रीशांताबाई कुटीर गए जहां कुलपति ने स्थान के महत्व से अवगत कराया। मुख्य अतिथि विद्यापीठ के संस्थापक पंडित हीरालाल शास्त्री एवं पदमभूषण रतन शास्त्री के निवास ‘गांधी’ घर भी गए। लक्ष्मीबाई मैदान में नायडू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। सेवादल की छात्राओं की सेरेमोनियल परेड का निरीक्षण किया।