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मंजिल भी नहीं होगी दूर, ‘चौखटी मुहैया कराएगी मजदूर

agriculture worker गुजरात के सीमावर्ती कोटड़ा क्षेत्र से जाने वाले खेतीहर मजदूरों की चौखटी स्थापित, मजदूर खुद तय कर सकेगा कि उसे मजदूरी कहां करनी है
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मंजिल भी नहीं होगी दूर, 'चौखटी मुहैया कराएगी मजदूर

मंजिल भी नहीं होगी दूर, 'चौखटी मुहैया कराएगी मजदूर

उदयपुर/ कोटड़ा (पस.) agriculture worker गुजरात से सटे इलाकों में खेतीहर मजदूरी के नाम पर गरीब तबके से हो रही ठगी पर अब विराम लगेगा। काम तलाशने वाली उनकी कमजोरी का अब दलाल फायदा नहीं उठा सकेंगे। बल्कि खेतीहर मजदूर खुद तय करेगा कि उसे कहां और किस किसान के यहां मजदूरी करनी है। जी हां! सुनने में एक बार अजीब लगे, लेकिन अब यह संभव हो सकेगा। स्थानीय खेतीहर मजदूरों की परेशानियों को देखते हुए आदिवासी विकास संस्थान और खेतीहर मजदूर अधिकार मंच ने 'चौखटीÓ की पहल की है। कोटड़ा व गुजरात में सक्रिय कोटड़ा अदिवासी संस्थान व खेतीहर मजदूर अधिकार मंच ने गुजरात के मेत्राल नामक स्थान पर चौखटी तय करते हुए प्राथमिक स्तर पर इसमें 160 खेतीहर मजदूर और 25 किसानों को शामिल किया है। सफलता यह रही कि इसमें सभी मजदूरों को हाथोंहाथ काम मिल गया। इसके गठन में गुजरात किसान संघ कोषाध्यक्ष वगता पटेल, श्रमिक प्रतिनिधि के तौर पर धर्मचंद्र खैर व खेतीहर मंच के अनिल सोलंकी मौजूद थे।
अब तक ऐसा
कोटड़ा क्षेत्र से 3 हजार 285 और गुजरात के सीमावर्ती पोसिना, खेड़ब्रह्म से 6 हजार 812 यानी कुल 10 हजार 97 के करीब श्रमिक मजदूरी करने जाते हंै। इनका मुख्य कार्य खेतों से मूंगफली निकालने, उड़द, सोयाबीन, मक्का की कटाई, गेंहू के लिए खेत तैयारी और सब्जी तोडऩे जैसे कार्य हैं।
वर्तमान व्यवस्था के तहत टैक्सी ड्राइवर तय रूट पर उन्हें खेतों पर छोड़कर आता है। वहीं शाम को सभी को एक साथ देर रात तक घर लाता है। ऐसे में किसानों को प्रतिदिन की मिलने वाली 2 सौ रुपए की मजदूरी में 50 रुपए जीप ड्राइवर रख लेता है। पूरे दिन मजदूरी और रात तक सफर के बीच किसान को सामान्य दिनचर्या के लिए केवल कुछ घंटों का समय मिलता है।

घरेलू महिलाएं ज्यादा परेशान
दिनचर्या के हिसाब से घरेलू महिलाएं मजदूरी के बीच परिवार को समय कम दे पाती हैं। सुबह 5 बजे उठकर भोजन बनाना। परिवार की सार संभाल कर वह मजदूरी को जाती है। देर शाम घर लौटने के बाद खाना बनाने और परिवार की सार संभाल में उन्हें सोने के लिए 10 से 11 बज जाती है।

चौखटी की स्थापना
संस्थान समन्वयक सरफराज शेख ने बताया कि मजदूर अभी तक वहीं जाते हैं, जहां टैक्सी ड्राइवर उन्हें लेकर जाता है। खेत मालिकों यानी किसान को भी वही मजदूर मिलते हंै, जो टैक्सी ड्राइवर लाता है। कई बार मजदूर- किसान एक दूसरे से संतुष्ट नहीं होते हैं। इसके लिए खेरोज और खेड़ब्रह्म के बीच मैत्राल गांव के बस स्टैंड पर मजदूर चौखटी स्थापित की गई है। इसके तहत सुबह के समय खेतीहर मजदूर मौके पर एकत्र होंगे। किसान भी मौके पर मजदूर लेने आएंगे। किसान और मजदूर यहां उनकी सुविधा अनुसार काम तय करेंगे। फायदा यह होगा कि मजदूर भी किसान से सीधे दिहाड़ी बढ़ाने की बात कर सकेंगे।

किसानों के यहां ठहरने की सुविधा
खेतिहर मजदूर अधिकार मंच की ओर से लागू व्यव्स्था के तहत किसान प्रतिदिन घर लौटने वाली मशक्कत से बच जाएगा। वाहनों में आने-जाने के बीच दुर्घटनाओं की आशंकाएं भी कम हो जाएंगी। agriculture worker चौखटी के माध्यम से मजदूरी कराने के लिए ले जाना वाला किसान खेतीहर मजदूरों के रहने की सुविधा भी मुहैया कराएगा। महिला मजदूरों को भी राहत मिलेगी।