
सिंदूर खेला
उदयपुर. नवरात्र शुरू हो चुके हैं और बंगाली समाज भी दुर्गा पूजा की तैयारियों में जुट गया है। समाज षष्ठी से पूजन शुरू करेगा, जो दशमी के साथ समाप्त होगा। इस बार कोविड-19 के कारण जहां इतने वर्षों में पहली बार दुर्गा माता की प्रतिमा नहीं सजाई जाएगी, वहीं, महिलाएं परंपरा के तहत सिंदूर भी नहीं खेलेंगी।
बंगाली समाज के तपन रॉय ने बताया कि दुर्गा पूजा का उत्सव षष्ठी के साथ ही शुरू हो जाएगा। हर साल भूपालपुरा स्थित बंग भवन में मां की विशालकाय प्रतिमा बंगाली कलाकार ही बनाते हैं और उसका भव्य शृंगार भी किया जाता है। वहीं, दशमी तक विविध पूजा-अनुष्ठान होते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी की गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए ही सभी आयोजन किए जाएंगे।
22 को होगी षष्ठी पूजा
रॉय ने बताया कि 22 को षष्ठी पूजा सुबह 7 बजे से प्रारंभ होगी। कोई पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण नहीं होगा। अष्टमी पूजन पर हमेशा बड़ा कार्यक्रम होता है, लेकिन इस बार सिर्फ संधि पूजा होगी, जिसमें 108 कमल के फूल चढ़ाए जाएंगे। पूरा कार्यक्रम 55 मिनट में समाप्त कर दिया जाएगा। वहीं, नवमी पर सुबह 7 बजे पूजा होगी और हवन अपरान्ह 3 बजे होगा। दशमी पर विसर्जन के दिन कलश ले जाकर स्वरूपसागर पर रख दिया जाएगा। वहीं, सिंदूर खेलाने की परंपरा सुहागिनें हमेशा करती हैं लेकिन इस बार सिंदूर नहीं खेलेंगी। सिंदूर केवल मां के पांवों में चढ़ाएंगी।
Updated on:
19 Oct 2020 07:51 pm
Published on:
19 Oct 2020 02:41 pm
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