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Child Adoption Report: अपनों ने बिसराया…गैरों और विदेशियों ने थामा हाथ, बेटों से ज्यादा गोद ली गईं बेटियां

Child Adoption Report: पिछले 10 साल में विदेशियों ने 4,963 भारतीय बच्चों को गोद लिया। सबसे अधिक 2,031 भारतीय बच्चे अमेरिका में गोद गए, जबकि 1,029 बच्चों के साथ इटली दूसरे नंबर पर है। पढ़ें मोहम्मद इलियास की रिपोर्ट...
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Child Adoption Report

Child Adoption Report (Photo-AI)

Child Adoption Report: उदयपुर: नवरात्र में कन्याओं को देवी मानकर घर-घर पूजा जाता है। लेकिन सच्चे मायनों में शक्ति उपासना वे परिवार कर रहे हैं, जिन्होंने पालना गृह में आई कन्याओं को अपनाकर अपनी सूनी गोद भरी।


बता दें कि गोद लिए गए बच्चों में 99 बेटियां हैं। विदेशी नागरिकों की ओर से गोद लिए गए 24 बच्चों में से भी 14 बेटियां हैं। ये भी वे बेटियां हैं, जो किसी न किसी बीमारी या शारीरिक अक्षमता से पीड़ित हैं। जिन्हें किसी ने नहीं अपनाया, लेकिन विदेशी जोड़ों ने पलकों पर बैठाया। नन्हीं देवियां अब सात समंदर पार स्नेह से पल रही हैं।


सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 साल में विदेशियों ने 4,963 भारतीय बच्चों को गोद लिया। सबसे अधिक 2,031 भारतीय बच्चे अमेरिका में गोद गए, जबकि 1,029 बच्चों के साथ इटली दूसरे नंबर पर है। स्पेन में 517, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में 252 और माल्टा में 215 भारतीय बच्चे गोद लिए गए हैं।


इन देशों में गए बच्चे


वर्ष 2017 से अब तक की स्थिति में विदेश गए सभी बच्चों में शारीरिक अक्षमता रही है। इसी वजह से यहां किसी ने नहीं अपनाया। जो बच्चे गोद लिए गए उनमें स्वीडन, फिनलैंड, कनाड़ा, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम, माल्टा, एक सिंगापुर और यूएसए में गए।


देश से अब तक 4,963 बच्चे गए विदेशों में


-कुल बच्चे अब तक गोद गए 177।
-बच्चे अलग-अलग राज्यों में गए 153।
-बच्चे इनमें विदेशों में गोद गए 24।
-बच्चे मेल कैटेगरी के रहे 68।
-फीमेल कैटेगरी रही है 85।


इनसे ग्रसित थे बच्चे


-6 बच्चे को हृदय की समस्या।
-5 जन्म से ही कमजोर।
-1 सीटीईवी।
-3 चर्म रोग से ग्रसित।
-6 बच्चों में विकास दर में कमी।
-1 बच्चा ट्रांसजेंडर।


लक्ष्मी बन बांट रही खुशियां


उदयपुर जिले के पालना गृह से अब तक 177 बच्चों को नया जीवन मिला है। इनमें 85 बेटियां ऐसी हैं, जिन्हें भारतीय परिवारों ने गोद लिया। जबकि 14 विदेशों में परिवार ले गए। लावारिस कही जाने वाली बेटियां अब कई घर-आंगन की लक्ष्मी बन खुशियां बांट रही हैं।
-दिशा भार्गव, अधीक्षक बालिका गृह (शिशु गृह)