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पत्‍नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को न्यायालय ने सुनाई ये सजा..

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उदयपुर . विवाहिता को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को न्यायालय ने आठ वर्ष की कैद व 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।गमानाफला बारापाल निवासी भीमा पुत्र धर्मा मीणा को पुलिस ने पत्नी मंजू को प्रताडि़त कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में गिरफ्तार किया था। चालान पेश होने पर अपर लोक अभियोजक प्रेमसिंह पंवार ने आवश्यक साक्ष्य व दस्तावेज पेश किए। आरोप सिद्ध होने पर अतिरिक्त सेशन न्यायालय (महिला उत्पीडन प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी डॉ.दुष्यंत दत्त ने आरोपी को धारा 306 में 8 वर्ष कठोर कारावास व 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में लिखा कि सामान्यतया किसी गवाह से यह अपेक्षित नहीं होता है कि वह रटारटाया बयान कोर्ट के समक्ष दे देगा। प्रत्येक गवाह के लिए न्यायालय का वातावरण सहज नहीं होता है। वैसे भी प्रत्येक व्यक्ति के तथ्यों को याद रखने और उन्हें व्यक्त करने की क्षमता भिन्न-भिन्न होती है। ऐसे में सूक्ष्म विरोधाभास आ सकते हैं। आरोपी शराब पीकर पत्नी से लड़ाई-झगड़ा कर उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त करता था। इसी कारण परिवादिया ने जीवन जीने से ज्यादा मरना अत्यधिक सुलभ व आसान समझा। ऐसे में नरमी का रूख नहीं अपनाया जा सकता।


यह था मामला

गोवद्र्धनविलास थाने में 21 जनवरी 17 को खजूरी निवासी शांतिलाल मीणा ने जीजा भीमा के खिलाफ रिपोर्ट दी कि बहन मंजू का भीमा से 15 वर्ष पहले विवाह करवाया था, उनके चार बच्चे हैं। आरोपी मंजू से झगड़ा करते हुए मारपीट करता था। कई बार पंचायत होने पर उसने माफी भी मांगी। ज्यादा परेशान होने पर उसने 1 जनवरी 2017 को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

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महिला सहित दो आरोपियों को तीन वर्ष की कैद

उदयपुर. जमीन की धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने एक महिला सहित दो आरोपियों को तीन-तीन वर्ष की कैद व 20-20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।सेक्टर-14 निवासी राजेन्द्र पुत्र गोपीकृष्ण बंसल ने 15 अपे्रल 2010 को इस्तगासे के जरिए नाई निवासी धनराज गर्ग व नांदवेल निवासी शांतिबाई गर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बताया कि वर्ष 2007 में व्यापार के दौरान धनराज से जान पहचान हुई। उसने बताया कि उसके मामा की नांदवेल में जमीन है। पैसों की आवश्यकता होने से वे बेच रहे हैं। आरोपी ने नांदवेल पटवार मंडल में खाता नम्बर 91 व पुराना 81 की सम्पूर्ण आराजी स्वयं की बताकर 5 लाख नकद लेकर विक्रय इकरार कर 4 माह केबाद रजिस्ट्री के लिए कहा। बाद में पलटते हुए आरोपियों ने गाली-गलौच कर मारपीट कर दी। मामला दर्ज होने पर सहायक अभियोजन अधिकारी उमा सालवी ने 8 गवाह व 9 दस्तावेज पेश किए। आरोप सिद्ध होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग क्रम-2 शहर दक्षिण के पीठासीन अधिकारी मनीषा चौधरी ने दोनों आरोपियों को धारा 420 में 3-3 वर्ष की कैद व 20-20 हजार की सजा सुनाई।


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