
दीपोत्सव पर्व पर ग्रामीण अंचल में आज भी धनतेरस पर घरोंं के आंगन में कायम है फूल मांडने की परंपरा
हेमन्त आमेटा/भटेवर. धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व हर बड़े शहर व कस्बों में मनाया जाता आ रहा है। लेकिन शहरों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में दीपोत्सव पर्व बड़ा ही अनूठा और उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। उदयपुर जिले के भटेवर गांव में धनतेरस पर्व पर वर्षोंं से चली आ रही परम्परा आज भी कायम है। धनतेरस पर्व के साथ ही अगले पांच दिनों तक दीपोत्सव पर्व मनाया जाता है। इसमें धनतेरस के दिन ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने घरों के बाहर आंगन को पीली मिटटी में गोबर मिलाकर आंगन पर लेपन करती है। इसके बाद लेपन के चारोंं और किनारों पर चूूने के मिश्रित गोल आरास से पुताई करते हुए आंगन को सुंदर रूप देती है। साथ ही आरास और हड़मसी (कलर) से घरोंं के दरवाजों के बीचोंंबीच विभिन्न प्रकार के फूल, रंगोली व कई आकृतियांं बनाती हैंं जिनको ग्रामीण भाषा में मांडने बनाना कहा जाता है। भटेवर सहित आस-पास के गांवोंं में ग्रामीणवेश की यह परम्परा सालोंं से चली आ रही हैै जिनका निर्वहन आज भी यहां महिलाओंं के द्वारा बखूबी किया जाता है। ग्रामीण महिलाओंं का मानना है कि घरोंं के आंगन में विभिन्न प्रकार की आकृतियांं मांडने एवं शुभ लाभ के चित्र बनाने पर लक्ष्मी माता की कृपा हमेशा बनी रहती है और घरोंं में सुख शांति के साथ धन धान्य की पूर्ति होती है।
Updated on:
06 Nov 2018 01:51 pm
Published on:
06 Nov 2018 01:51 pm
