
मृत्युभोज व पहरावणी प्रभा पर रोकथाम के प्रयास सफल
उदयपुर/ झाड़ोल. उपखण्ड क्षेत्र में क्षत्रिय समाज की ओर से महाराणा प्रताप जंयती पर सार्वजनिक मंच से मृत्युभोज व पहरावणी प्रथा पर रोक लगाने के प्रयास अब रंग लाते दिख रहे हैं। हाल ही में सामने आई विषम परिस्थितियों में समाज की ओर से मिले सहयोग इस कुरूति का पतन होना संभव दिख रहा है। हाल ही में एक सप्ताह पूर्व शिशवी गांव में राजकुंवर पत्नी गमेरसिंह सोलंकी की मृत्यु के उपरांत क्षत्रिय युवा संगठन पदाधिकारी रविवार को गमगीन परिवार के शोकमिलन को पहुंचे। उपस्थित परिजनों से १२वें का मृत्युभोज नहीं करने की अपील की। साथ ही सार्वजनिक मंच से ली गई शपथ की याद दिलाई। साथ ही रंगदस्तूर कार्यक्रम में पहरावणी के कपड़े ननिहाल व ससुराल पक्ष के अलावा किसी से भी नहीं लिए जाने की अपील की। शोक स्थल पर मौजूद सभी स्वजनों ने इस कुप्रथा के रोकथाम की पहल की सराहना करते हुए पूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए आश्वस्त किया। धूप दस्तूर के लिए दूर दराज से आने वाले मेहमानों के लिए सिर्फ दाल-पूरी ही बनाने पर सहमति दी। संगठन के इस प्रयास ने परिवार को हजारों रुपए के कर्ज में डूबने से बचा लिया। इसी प्रकार बीते सप्ताह आवरड़ा एवं छातरडी में शोकाकुल परिवारों से संपर्क कर मृत्युभोज व पहरावणी नही लेने की अपील की थी, जिसे मानते हुए चौहान परिवार ने संगठन का सहयोग कर अनूठा उदाहरण पेश किया। संगठन की तरफ से भोपाल सिंह शक्तावत, शेर सिंह शक्तावत,गोपाल सिंह शक्तावत, गजेंद्र सिंह चूण्डावत, खुशवंत सिंह दुलावत, बलवंत सिंह पंवार, भैरू सिंह पंवार, लक्ष्मण सिंह झाला,लाल सिंह पंवार ,कुबेर सिंह पडि़हार, लक्ष्मण सिंह चुंडावत, अरविंद सिंह झाला,लाल सिंह पडि़हार, भेरू सिंह देवड़ा, गजेंद्र सिंह पडि़हार एवं अन्य मौजूद थे। ये जानकारी संगठन सदस्य मानवेंद्रसिंह चौहान ने दी।
Published on:
15 Jul 2019 06:00 am
