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भारतीयों के लिए बहुत बड़ा उदाहरण: खुशी के पलों में नहीं साथ, द:ुख की घड़ी में भी हर पल साथ होता है गांव

example for society न जाति, न धर्म सिर्फ मानवता का संदेश
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भारतीयों के लिए बहुत बड़ा उदाहरण: खुशी के पलों में नहीं साथ, द:ुख की घड़ी में भी हर पल साथ होता है गांव

भारतीयों के लिए बहुत बड़ा उदाहरण: खुशी के पलों में नहीं साथ, द:ुख की घड़ी में भी हर पल साथ होता है गांव

उदयपुर/ बनोड़ा. example for society कहने को तो उदयपुर संभाग की सलूंबर तहसील की ग्राम पंचायत बनोड़ा आदिवासी बाहुल्य है, लेकिन यहां का जीवन जाति, धर्म से हटकर मानवीय मूल्यों के लिए आदर्श बना हुआ है। अपनेपन, सहयोग और सहकार में बेमिसाल ये लोग अपणायत को जीते हैं। बहुत दूर की नहीं बात पिछले दो वर्षों की करें तो संकट में आए यहां रहने वाले परिवारों को सहकार की भावना के चलते ही संबल मिला है। मुसीबत में पीडि़त परिवारों को अपनों की नहीं बल्कि दूसरे समाजों से भी सहयोग मिला है। राजस्थान पत्रिका ने इस ओर रूख किया तो अपनेपन का मीठा ताना-बाना इस आबादी में देखने को मिला। जानिएं कैसे इन समाजों ने एक-दूसरे के साथ किस तरह से सुख और दु:ख को साझा किया।

केस 1:- कुछ समय पहले गरीब परिवार से कैलाश औदिच्य की मृत्यु हो गई। ग्रामीणों ने एकजुटता का संदेश दिया और मृत्यु के बाद आर्थिक सहयोग से सभी क्रिया कर्म किए।
केस 2:- कस्बा निवासी कालूलाल चौबीसा की विद्युत निगम के जीएसएस में कार्य करते समय करंट लगने से मौत हो गई। लोगों ने सामूहिक एकता का परिचय देते हुए निगम कार्यालय सलूंबर जाकर धरना प्रदर्शन किया। साथ ही प्रशासन से सहायता राशि देने पर मजबूर किया।
केस 3:- कुछ दिन पूर्व सलूंबर-बनोड़ा मार्ग पर रोड़ीलाल पटेल उसके खेत पर पेड़ काट रहा था। तभी बाइक से गुजरती महिला के सिर पर टहनी गिरी और उसकी मौत हो गई। गांव वालों ने मुसीबत से निकालने के लिए रोड़ीलाल का आर्थिक सहयोग किया।
केस 4: हाल ही में खेमराज उर्फ कन्हैयालाल सालवी की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर परिजनों को सहायता राशि सौंपी।

मदद की मंजिल मुम्बई व अहमदाबाद भी
बनोड़ा एवं सेदरी गांव से रोजगार को लेकर मुंबई व अहमदाबाद गए हुए लोग भी मुसीबत के समय लोगों की मदद को लेकर राशि एकत्र कर गांव तक पहुंचाते हैं।

प्रेरणा का माध्यम सोशल मीडिया
मुसीबत के समय लोगों के सहयोग की प्रेरणा का बड़ा मंच सोशल मीडिया ग्रुप है। इसके माध्यम से एक संदेश ग्रुप में चलता है, जिसे लेकर लोग चंदा राशि जुटाने में हर संभव प्रयास करते हैं। बच्चे और महिलाएं भी आर्थिक मदद में भागीदारी निभाती हैं। कस्बे के मौतबीर भी कार्य विशेष के लिए युवाओं की मदद करते हैं।

समीपवर्ती गांवों में भी डंका
बनोड़ा के जागरूक युवाओं का यह डंका समीपवर्ती इलाकों में भी है। इलाके में धारणा है कि बनोड़ा के लोग गरीब के सहयोग को लेकर दिल से मदद करते हैं। बनोड़ा एवं सेदड़ी गांव में किसी भी अप्रिय घटना पर सरकारी योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाती है। मदद के लिए युवा संबंधित पीडि़त व्यक्ति से सरकारी योजना के लिए आवेदन कराने में भी सहयोग निभाते हैं। example for society सरकारी लाभ में भी पीडि़त को प्राथमिकता मिलती है।